जिले के झाझा अंचल में गैरमजरूआ भूमि को अधिकारियों की टोली ने नियमों को ताक पर रखकर रैयती भूमि बनाकर नामांतरण कर दिया।
जब सरकार ने अपनी भूमि की खोज शुरू की तो झाझा अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी अमित कुमार रंजन तथा दो राजस्व कर्मचारी सह राजस्व अधिकारी अवधेश कुमार और रामानंद दास के काले कारनामों की पोल खुल गई।
नगर परिषद सहित प्रखंड के कई हल्कों की कई एकड़ भूमि को रैयती बनाकर नामांतरण कर दिया गया, जबकि इस बीच यही राजस्व कर्मचारी और अंचलाधिकारी ने उक्त भूमि के नामांतरण के लिए पड़े कई आवेदनों को गैरमजरूआ भूमि बताते हुए रद कर दिया था, लेकिन यही तीनों अधिकारियों ने नगर परिषद की दर्जनों भूमि का नामांतरण कर दिया गया।
जिलाधिकारी ने एक संयुक्त टीम गठित कर मामले की जांच कराई तो अंचल के काले कारनामों की पूरी परत खुलकर सामने आ गई। जिलाधिकारी के निर्देश पर अंचलाधिकारी निशा सिंह ने तत्कालीन अंचलाधिकारी सहित दोनों कर्मचारियों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराया है।
साथ ही प्रथम जांच में सामने आए 92 गैरमजरूआ भूमि के नामांतरण को रद करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
वहीं, अधिकारियों द्वारा उठाए गए इस कदम के पीछे की वजह को लेकर अंदरखाने कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। सबसे अहम बात यह सामने आई है कि इस पूरे मामले के पीछे भू-माफिया का बड़ा हाथ हो सकता है।
कई भूमि का नामांतरण होने के बाद भू-माफिया द्वारा उसकी खरीद-बिक्री भी कर दी गई है, जिससे कई खरीदारों की सांसें अटक गई हैं।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस दिशा में आगे क्या कदम उठाता है। विशेषकर नगर परिषद क्षेत्र के नावाडीह मौजा में दो दर्जन से अधिक लोगों ने गैरमजरूआ भूमि का नामांतरण करा रखा है।
अंचलाधिकारी ने बताया कि जिला दंडाधिकारी-सह-समाहर्ता द्वारा 27 फरवरी को अंचल कार्यालय के निरीक्षण को लेकर एक जांच समिति का गठन किया था।
जांच प्रतिवेदन में यह सामने आया कि तत्कालीन राजस्व कर्मचारी सह झाझा के प्रभारी राजस्व अधिकारी अवधेश कुमार और रामानंद दास तथा तत्कालीन अंचलाधिकारी अमित कुमार रंजन द्वारा कुछ नामांतरण वादों को यह बताते हुए अस्वीकृत कर दिया गया कि संबंधित खाता एवं खेसरा गैरमजरूआ खाते की भूमि है।
बाद में उन्हीं खाता-खेसरा की भूमि का अन्य लोगों के नाम नामांतरण स्वीकृत कर दिया गया।
जांच समिति ने इन कर्मियों एवं पदाधिकारियों के विरुद्ध मेंस रिया तथा सरकार के प्रति ईमानदारी के उल्लंघन का उल्लेख करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ एफआईआर दर्ज कराने की अनुशंसा की थी।
इसी निर्देश के आलोक में तत्कालीन अंचलाधिकारी सहित तीनों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है। थानाध्यक्ष संजय कुमार ने बताया कि अंचलाधिकारी के आवेदन पर केस दर्ज कर कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।