अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद अब जवाबी हमलों का सिलसिला शुरू हो गया है।
इस तनाव भरे माहौल में इजरायल ने हिजबुल्लाह के रॉकेट हमलों को रोकने के लिए अपना लेजर आधारित एयर डिफेंस सिस्टम आयरन बीम तैनात कर दिया है।
इस बीच आयरन बीम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि रॉकेट और अन्य हवाई खतरे हवा में ही गायब हो रहे हैं, बिना किसी मिसाइल या विस्फोट के निशान के ये सब हो रहा है। यह सब निर्देशित ऊर्जा हथियार यानी लेजर बीम का कमाल है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, आयरन बीम अब सक्रिय रूप से काम कर रहा है और आने वाले रॉकेट्स को बीच हवा में ही नेस्तनाबूद कर रहा है।
पारंपरिक डिफेंस सिस्टम की तरह इसमें गोले या मिसाइल नहीं छूटते, बल्कि सिर्फ एक अदृश्य लेजर किरण से काम हो जाता है। इससे दुश्मन को भी समझ नहीं आता कि हमला कहां से हुआ।
आयरन बीम सिस्टम की अहम खूबियां क्या हैं?
आयरन बीम एक हाई-एनर्जी डायरेक्टेड एनर्जी वेपन है, जो खास तौर पर छोटी दूरी के एयर डिफेंस के लिए बनाया गया है।
यह सिस्टम एक ट्रक पर लगाया जाता है, जिससे इसे जरूरत पड़ने पर आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इसका मुख्य हिस्सा एक बड़ा गोलाकार लेंस है जो नीले आसमान की तरफ देखता हुआ नजर आता है।
यह सिस्टम करीब 100 किलोवाट का सॉलिड-स्टेट लेजर इस्तेमाल करता है। लेजर किरण इतनी ताकतवर होती है कि टारगेट को तुरंत गर्म कर देती है, जलाती है या उसकी संरचना को कमजोर करके हवा में ही तबाह कर देती है। इससे रॉकेट या ड्रोन बिना जमीन पर पहुंचे ही खत्म हो जाते हैं।
आयरन बीम कैसे खतरों को तबाह कर सकता है?
आयरन बीम ड्रोन्स यानी यूएवी, रॉकेट, मोर्टार शेल्स, आर्टिलरी राउंड्स और शॉर्ट-रेंज मिसाइल्स को आसानी से नष्ट कर सकता है। हर शॉट की लागत सिर्फ 3 से 10 डॉलर के बीच अनुमानित है, जो पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की तुलना में बहुत सस्ता है।
इससे इजरायल को लगातार हमलों का जवाब देने में बहुत फायदा हो रहा है। एक बार फायर करने के बाद भी यह जल्दी रिचार्ज हो जाता है और फिर तैयार हो जाता है।
क्या आयरन बीम की कुछ कमियां भी हैं?
हालांकि आयरन बीम के कुछ कमजोर पहलू भी हैं। बादल, बारिश, धूल या धुएं में इसकी असर कम हो जाता है क्योंकि लेजर किरण इन चीजों से रुक सकती है। इसे लगातार बीम ट्रैकिंग की जरूरत पड़ती है, यानी टारगेट पर नजर बनाए रखनी पड़ती है।
इसकी रेंज मिसाइल आधारित सिस्टम्स से कम है और लगातार फायरिंग के बाद कूलिंग के लिए थोड़ा ब्रेक भी लेना पड़ता है। फिर भी मौजूदा हालात में यह इजरायल के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है।