Iran का United States से बातचीत पर सख्त रुख, पहले दो शर्तें मानने की रखी मांग…

 ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ बातचीत तभी शुरू करेगा, जब लेबनान में पूरी तरह सीजफायर लागू हो और उसकी फंसी हुई संपत्तियां वापस की जाएं।

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि ये दोनों शर्तें पहले ही तय हो चुकी थीं, लेकिन अब तक पूरी नहीं हुई हैं।

उन्होंने कहा कि इन शर्तों को पूरा किए बिना किसी भी तरह की बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती। गालिबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बातचीत शुरू करने से पहले इन दोनों मुद्दों का हल जरूरी है।

ईरान का कहना है कि इन शर्तों के पूरा न होने से दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और बढ़ गई है।

अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप

ईरान ने इससे पहले अमेरिका पर आरोप लगाया था कि उसने बातचीत शुरू होने से पहले ही उसके 10 सूत्रीय प्रस्ताव के तीन अहम बिंदुओं का उल्लंघन किया है।

इनमें लेबनान में सीजफायर लागू न होना, फार्स प्रांत में एक ड्रोन का घुसना और उसे मार गिराना, और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को न मानना शामिल है।

गालिबाफ ने कहा कि यह सब पुराने अविश्वास की वजह से हो रहा है और ऐसे माहौल में बातचीत करना ठीक नहीं है।

न्यूक्लियर मुद्दे पर भी टकराव

ईरान के परमाणु प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने भी कहा कि यूरेनियम संवर्धन का अधिकार उनके लिए जरूरी है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम घोषित किया गया था, लेकिन उसके बाद भी हालात पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं।

इजरायल ने बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए, जिसमें बुधवार को 182 लोगों की मौत हो गई, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।

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