इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने चेतावनी दी है कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व वाली ईरान की नई व्यवस्था पुराने शासन से कहीं ज्यादा कट्टर और सख्त है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि इस्लामाबाद में शांति वार्ता करने वाले हैं।
इजरायली संसद की विदेश मामलों और रक्षा समिति को दिए गए बंद कमरे वाले इंटेलिजेंस ब्रिफिंग में IDF प्रतिनिधियों ने कहा कि ईरान की नई नेतृत्व व्यवस्था अपने पूर्ववर्ती से भी ज्यादा चरमपंथी है।
टाइम्स ऑफ इजराइल के अनुसार, IDF ने कहा कि नई ईरानी नेतृत्व व्यवस्था का बड़ा हिस्सा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से आया है, जिसे देश की पुरानी राजनीतिक नेतृत्व से ज्यादा विचारधारा से कट्टर माना जाता है।
पुरानी व्यवस्था पर इजरायली हमले
सीजफायर से पहले इजरायली वायुसेना ने ईरान में सैकड़ों हमले किए थे। इस अभियान में 13,000 से ज्यादा गोले दागे गए, जिसमें सैन्य और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस संयुक्त अभियान में ईरान के कई वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य नेता मारे गए, जिनमें सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनी भी शामिल थे।
इजरायल और अमेरिका द्वारा 28 फरवरी को शुरू किया गया यह अभियान शासन परिवर्तन, ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना, उसके परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों का मुकाबला करना तथा अंदरूनी विद्रोह की स्थितियां तैयार करना था।
सीजफायर के बावजूद तनाव बरकरार
दो दिन पुराना सीजफायर अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हवाई हमलों को रोकने में कामयाब रहा है, लेकिन हार्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी अभी भी जारी है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अभूतपूर्व असर पड़ा है।
इसके अलावा लेबनान में इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच गोलीबारी भी जारी है। अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, जबकि इस्लामाबाद में दोनों के बीच पहली शांति वार्ता होने वाली है।