ईरान के सस्ते ड्रोन अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बने, पिछले 15 दिनों में पश्चिम एशिया में मचाया तांडव…

ईरान पर हमला अमेरिका ने जितना आसान समझा था वैसा नहीं रहा। ईरान के सस्ते ड्रोन अमेरिका के लिए मुसीबत बन गए हैं। सैन्य संघर्ष के पंद्रह दिन बीत चुके हैं।

अमेरिका का दावा है कि ईरान की हमला करने की क्षमता दिन-प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है, लेकिन देखा जाए तो ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है।

ईरान के लिए इन ड्रोनों को तैनात करना आसान है, लेकिन इन्हें नष्ट करना उतना ही मुश्किल है।

उन्नत हथियारों का मुकाबला

ड्रोन हमलों की बौछार के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों को ऐसे सुरक्षा तंत्रों का उपयोग करने के लिए मजबूर कर दिया है, जो मुख्य रूप से अधिक उन्नत हथियारों का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

पूर्व अमेरिकी अधिकारियों और सैन्य विशेषज्ञों ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि ईरान ने खुफिया जानकारी, रूस से सीखे गए सबक, सेटेलाइट तस्वीरों और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अपनी भौगोलिक निकटता का इस्तेमाल किया है। अब तक की जवाबी कार्रवाई में कम लागत वाले इन ड्रोनों की बड़ी भूमिका रही है।

शाहेद ड्रोन ने उड़ा रखी है नींद

हाल के दिनों में ईरानी सेना ने बड़ी संख्या में ड्रोन लांच किए हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में, टैंकरों और व्यापारिक जहाजों, ओमान के एक बंदरगाह, दुबई हवाई अड्डे के पास के इलाकों, अबू धाबी की तेल रिफाइनरी और कुवैत के हवाई अड्डे पर हमले हुए।

इनमें से कई अभियानों में ड्रोन, खासकर शाहेद का इस्तेमाल किया गया। ये उन मिसाइलों की तुलना में कहीं कम लागत वाले हैं, जिन्हें रोकने के लिए उन्नत अमेरिकी रक्षा प्रणालियां बनाई गई हैं। एक शाहेद ड्रोन की कीमत 20,000 डॉलर है। वहीं एक पैट्रियट मिसाइल की कीमत 40 लाख डॉलर है। अगर ईरानी ड्रोन को मार भी गिराया जाता है, तो यह अमेरिका पर वित्तीय बोझ ही डाल रहा है।

मोटरसाइकिल इंजन का इस्तेमाल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये ड्रोन मोटरसाइकिल के इंजन से चलते हैं और 25 से 50 किलो युद्धक हथियार ले जा सकते हैं। मिसाइलों की तुलना में काफी सस्ते, लांच करने में आसान और नष्ट करना मुश्किल है। लांच पैड को पिकअप ट्रकों पर लगाया जा सकता है और एक स्थान से दूसरे स्थान पर जल्दी से ले जाया जा सकता है।

ये सैटेलाइट नेविगेशन का उपयोग कर सटीक लक्ष्यों पर हमला कर सकते हैं। बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, ये जमीन के करीब उड़ते हैं और निश्चित उड़ान पथ का अनुसरण नहीं करते। इसलिए रडार द्वारा पकड़ना आसान नहीं होता।

रूस का अनुभव बन रहा मददगार

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान ने यूक्रेन में रूस द्वारा शाहेद ड्रोन के युद्धकालीन उपयोग से भी सीखा है। उसने ड्रोन को एक ही लक्ष्य की ओर अलग-अलग रास्तों से भेजना सीख लिया है। इससे उन्हें रोकना मुश्किल हो गया है। ओस्लो विश्वविद्यालय के मिसाइल युद्ध विशेषज्ञ फैबियन हाफमैन के अनुसार, कुछ ईरानी ड्रोनों में रूसी तकनीक भी शामिल प्रतीत होती है, जो उन्हें जैमिंग से बचाने में मदद करती है।

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