ईरान संकट: इंडिगो और एयर इंडिया ने सरकार से सहायता मांगी…

भारतीय एयरलाइंस इंडिगो ने सरकार से ईंधन कर में कटौती की मांग की है और प्रतिद्वंद्वी एअर इंडिया के साथ मिलकर नई दिल्ली से निजी हवाई अड्डों से कुछ शुल्क कम करने का दबाव बना रही है, क्योंकि पश्चिम एशिया में संघर्ष ने एयरलाइनों की वित्तीय स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

इंडिगो और एयर इंडिया को एक साथ दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ईरान युद्ध के कारण एयरलाइनों के लिए पश्चिम एशिया के एयरस्पेस का उपयोग करना मुश्किल हो गया है, जबकि भारतीय एयरलाइनों को पहले से ही पाकिस्तान के एयरस्पेस से प्रतिबंधित किया गया है, जो नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच कूटनीतिक तनाव के कारण है।

इससे दोनों एयरलाइनों को अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर उच्च लागत का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें लंबे रूट लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिसमें इंडिगो अफ्रीका के रास्ते ब्रिटेन के लिए उड़ान भर रहा है और एअर इंडिया कुछ उड़ानों में उत्तरी अमेरिका के लिए एक स्टाप जोड़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार एयरलाइंस विशेष रूप से विमानन से संबंधित करों और शुल्कों के संबंध में भारत सरकार से वित्तीय राहत की मांग कर रही हैं।

इंडिगो विमानन टरबाइन ईंधन पर कर राहत की मांग कर रहा है, जो एयरलाइन के खर्चों का 30-40त्‍‌न बनाता है, लेकिन इस पर 11 फीसदी का संघीय कर और अतिरिक्त राज्य कर लगते हैं, जो 29 फीसदी तक हो सकते हैं।

इंडिगो, एअर इंडिया और भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने टिप्पणी के लिए अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। इंडिगो का जनवरी में घरेलू बाजार में 63.6त्‍‌न हिस्सा था, जबकि एअर इंडिया समूह का 26.5 फीसदी हिस्सा था।

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