ईरान को तबाह करने की बात करने वाले ट्रंप के बदले तेवर, होर्मुज खोले बिना ही युद्ध खत्म करने के संकेत दिए…

मिडिल ईस्ट में चल रही लड़ाई के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को चार से छह हफ्तों के भीतर समाप्त करने के संकेत दिए हैं। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका अब मिडिल ईस्ट की ऊर्जा पर निर्भर नहीं है, ऐसे में वह होर्मुज स्ट्रेट को खोले बिना ही ईरान के साथ चल रहे युद्ध को समाप्त कर सकते हैं।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान में US मिलिट्री कैंपेन खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने अपने सहयोगियों को संकेत दिया कि वह चार से छह हफ्ते के टाइमलाइन में ईरान के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन खत्म करने के लिए तैयार हैं, भले ही होर्मुज स्ट्रेट बंद रहे।

लक्ष्य हासिल करने के बाद खत्म कर सकते हैं मिलिट्री ऑपरेशन

ट्रंप का मानना है कि यदि अमेरिका ईरान की नौसैनिक और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करने जैसे अपने मुख्य उद्देश्यों को हासिल कर लेता है, तो होर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने के बावजूद वह अपनी दुश्मनी खत्म कर सकता है और जीत का एलान कर सकता है।

अमेरिका मिडिल ईस्ट की उर्जा पर निर्भर नहीं

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट से होकर जाने वाला 84% तेल एशियाई बाजारों में जाता है। ऐसे में इसे फिर से खोलना अब एशिया और यूरोप की प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि अमेरिका अब मिडिल ईस्ट की ऊर्जा पर निर्भर नहीं है।

ट्रंप के इस फैसले से शायद होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कंट्रोल और अधिक बढ़ जाएगा, अगर ट्रंप ऐसा करते हैं तो ईरान का दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर नियंत्रण बना रह सकता है, जिससे इसे फिर से खोलने के लिए डिप्लोमैटिक कोशिशों पर फोकस होगा।

ट्रंप का यू-टर्न

गौरतलब है कि ट्रंप ने ईरान को बार-बार चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को रोका तो भीषण हमले किए जाएंगे। ईरान को बार-बार बर्बाद करने की धमकी देने के बाद होर्मुज स्ट्रेट को बिना खुलवाए पीछे हटना ट्रंप का बड़ा यू-टर्न है।

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप और उनके सलाहकारों का मानना है कि अगर वह होर्मुज को जबरन खुलवाने की कोशिश करते हैं तो युद्ध लंबा खींच सकता है, ऐसे में ट्रंप प्रशासन ने तय किया है कि वह होर्मुज को खुलवाने की बजाय मौजूदा रणनीति सैन्य अभियानों को कम करने से पहले ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करने पर फोकस कर रहा है। 

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