“मध्य प्रदेश में उर्वरक को सूंघकर ड्रग्स बताया, जांच में दो बार फेल; किरकिरी के बाद उठाया यह कदम….

मध्य प्रदेश के प्रशिक्षु आइपीएस अधिकारियों ने अपनी छवि चमकाने के लिए उर्वरक को ‘एमडी ड्रग्स’ बताकर केस बना दिया और दो आरोपितों के साथ ही सिपाही को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

एसआइ ने उर्वरक को अनुभव (सूंघकर) के आधार पर बताया कि जब्त पदार्थ एमडी ड्रग्स ही है। सच्चाई तब सामने आई, जब जांच के दौरान कथित एमडी ड्रग्स दो बार की जांच में उर्वरक साबित हुई।

गलती छिपाने के लिए पुलिस अधिकारियों ने अब मुकदमे के निरस्तीकरण की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत कर दी है। इंदौर शहर के तेजाजी थाना पुलिस ने 26 फरवरी 2025 को दो लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दोनों आरोपितों के पास से एमडी ड्रग्स की बरामदगी दिखाई।

इस मामले में आजाद नगर थाने के सिपाही को भी गिरफ्तार किया और दावा किया कि उसकी मदद से ही यह दोनों ड्रग्स बेच रहे थे।

केस में मोड़ उस समय आया जब फोरेंसिक जांच में जब्त पदार्थ पोटेशियम नाइट्रेट निकाला। हैदराबाद के सीएफएसएल लैब ने भी जब्त पदार्थ को पोटेशियम नाइट्रेट ही बताया।

इसके बाद पुलिस बैकफुट पर आई और सभी आरोपितों के विरुद्ध कोर्ट में मुकदमा निरस्त करने की रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। मंगलवार को विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) ने इसे स्वीकृत कर लिया।

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