पाकिस्तान में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच समझौता नहीं बनने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ईरान पर सीमित सैन्य हमले करने के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को इन विकल्पों पर चर्चा की गई। यह चर्चा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में हुई।
बताया जा रहा है कि, यह वार्ता ईरान के अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने से इनकार करने के कारण सफल नहीं हो सका। हालांकि, बड़े पैमाने पर बमबारी का अभियान चलाने का विकल्प अभी भी खुला है, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया कि इसकी संभावना कम है। इसकी वजह क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर चिंताएं और ट्रंप की किसी लंबे संघर्ष में न पड़ने की अनिच्छा है।
लड़ाई या बीतचीत दोनों के लिए अमेरिका तैयार
एक अस्थायी नाकेबंदी के साथ-साथ, सहयोगियों पर इस बात का दबाव बनाना भी विचाराधीन है कि, वह जलडमरूमध्य में लंबे समय तक सुरक्षा देने की भूमिका निभाएं। ट्रंप, जिन्होंने रविवार का दिन फ्लोरिडा में अपने डोराल रिसॉर्ट में बिताया, उन्होंने संकेत दिया कि वे कूटनीति के लिए अभी भी तैयार हैं, भले ही उन्होंने ईरान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ अपनी धमकियां बढ़ा दी हों।
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज पर कहा, “मैं ऐसा करना बिल्कुल नहीं चाहूंगा, लेकिन यह उनका पानी है, उनके बिजली उत्पादन संयंत्र हैं, जिन पर हमला करना बहुत आसान है।” व्हाइट हाउस ने अगले विशिष्ट कदमों के बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया। प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने कहा, “राष्ट्रपति पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य पर नौसैनिक नाकेबंदी का आदेश दे चुके हैं, जिससे ईरान की ब्लैकमेलिंग खत्म हो जाएगी; और वे समझदारी से सभी अतिरिक्त विकल्पों को अभी भी खुला रखे हुए हैं।”
हर विकल्प में जोखिम : अमेरिकी अधिकारी
वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी कि हर विकल्प में जोखिम हैं। बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान अमेरिकी संसाधनों पर दबाव डाल सकता है और देश के भीतर विरोध पैदा कर सकता है, जबकि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं या जलडमरूमध्य पर उसके नियंत्रण को रोके बिना अभियानों को कम करना तेहरान के लिए एक रणनीतिक जीत के तौर पर देखा जा सकता है।
इसके अलावा कुछ विश्लेषकों ने नाकेबंदी को सबसे व्यावहारिक विकल्प बताया। मैथ्यू क्रोनिग ने कहा, “हमने देखा है कि नाकेबंदी की यह रणनीति वेनेज़ुएला के मामले में काफी हद तक सफल रही है, और ट्रंप के पास इसे यहां भी दोहराने का मौका है।मुझे लगता है कि यह मौजूदा शासन पर दबाव बढ़ाने और उन्हें कुछ मुश्किल दुविधाओं में फंसाने का एक तरीका है।”
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने आगाह किया कि इस संकरे जलडमरूमध्य में नाकेबंदी लागू करने से नौसेना मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में आ सकती है। प्रतिबंधों और हाल ही में अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों के बावजूद ईरान अपने रुख पर अड़ा हुआ है।