लेजर, सैटेलाइट और साइबर वॉरफेयर के जरिए अमेरिका किस तरह ईरानी हथियारों को निष्क्रिय कर रहा है? जानें पूरी रणनीति…

मिडिल ईस्ट के आसमान में ईरानी हथियारों के टुकड़े बिखर रहे हैं। कई मिसाइलें और ड्रोन उड़ान के दौरान टूटकर या इलेक्ट्रॉनिक रुकावट से नाकाम होकर गिर रहे हैं।

इन असफलताओं के पीछे अमेरिका की विकसित तकनीक का एक मजबूत नेटवर्क काम कर रहा है, जिसमें हीट-ट्रैकिंग सैटेलाइट, साइबर वॉर उपकरण और हवाई खतरों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किए गए लेटेस्ट लेजर सिस्टम शामिल हैं।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से कुछ क्षमताओं का इस्तेमाल ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में हो रहा है, जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ है। अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के परमाणु, मिसाइल और सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं।

ईरानी मिसाइलों को बेअसर कर रहा अमेरिका 

इन सबके बीच सबसे ज्यादा चर्चा मिडिल ईस्ट के तट पर तैनात अमेरिकी नौसेना के एक विध्वंसक जहाज पर लेजर हथियार की तैनाती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा जारी वीडियो में एक जहाज दिख रहा है, जो हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम (HELIOS) से लैस है। इसमें इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल डैजलर और सर्विलांस सिस्टम है। यह स्टीयरेबल लेजर हवाई लक्ष्यों पर शक्तिशाली ऊर्जा बीम फोकस कर सकता है, जिससे ड्रोन और अन्य खतरे कुछ सेकंड में निष्क्रिय हो जाते हैं।

इजरायल-लेबनान सीमा के पास की फुटेज में रॉकेट लॉन्च होते दिखाई दिए, जो कुछ सेकंड बाद ही फट फट गये। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसमें इजरायल का एक्सपेरिमेंटल आयरन बीम लेजर डिफेंस सिस्टम शामिल हो सकता है, जो रॉकेटों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही खत्म करने के लिए बनाया गया है।

लेजर, सैटेलाइट और साइबर वॉर का इस्तेमाल 

अभी तक अमेरिकी नौसेना या इजरायली सेना ने हमले में लेजर हथियारों के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हालांकि, फरवरी की शुरुआत में नौसेना ने स्वीकार किया था कि HELIOS ने परीक्षण में चार ड्रोन सफलतापूर्वक मार गिरे थे, जो दर्शाता है कि यह तकनीक पहले से एक्टिव है।

युद्ध की शुरुआत बहुत तेज रही। पहले 72 घंटों में अमेरिकी बलों ने लगभग 1,700 टारगेट पर हमला किया। 200 से अधिक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर नष्ट किए गए, जो देश के आधे हथियारों के बराबर हैं। सैकड़ों मिसाइलें लॉन्च होने से पहले ही खत्म कर दी गईं। यह सटीकता मुख्य रूप से ऊपरी स्तर पर काम करने वाले एसेट्स की वजह से संभव हुई।

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