आतंक का अड्डा कैसे बनी अल फलाह यूनिवर्सिटी? ED ने कसा शिकंजा, 25 जगहों पर छापे… अब तक क्या-क्या खुलासा हुआ?…

राष्ट्रीय राजधानी से सटे फरीदाबाद में आतंक का अड्डा बने अल फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर, मैनेजिंग ट्रस्टी व डायरेक्टर जावेद अहमद सिद्दीकी को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है।

अल फलाह यूनिवर्सिटी के ठिकानों पर मारे गए फंड की गड़बड़ी के ठोस सबूत मिलने और जांच में सहयोग नहीं करने को देखते हुए ईडी ने यह फैसला लिया है।

ईडी की टीमें सुबह से ही अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े 25 स्थानों पर छापा मार रही थीं। ध्यान देने की बात है कि गृह मंत्री अमित शाह ने ईडी के साथ-साथ वित्तीय अपराध से जुड़ी सभी एजेंसियों को अल फलाह यूनिवर्सिटी के फॉरेंसिंक जांच का निर्देश दिया था।

ईडी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार अल फलाह यूनिवर्सिटी पर छापे की कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत उसके खिलाफ दर्ज मामले में की गई है।

ईडी के हाथ लगे अहम सबूत

छापे की कार्रवाई अल फलाह यूनिवर्सिटी के साथ-साथ उसके प्रमोटरों से जुड़े अन्य कंपनियों के खिलाफ भी की गई है। छापे के दौरान अल फलाह यूनिवर्सिटी पर लगे फंड के साथ-साथ नियमों और कानूनों के बड़े पैमाने पर उल्लंघन के सबूत मिले हैं।

ईडी के सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच के दौरान मुखौटा कंपनियों के सहारे बड़ी मात्रा में पैसे के मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत भी मिले हैं।

उनके अनुसार जिन नौ कंपनियों के नाम अल फलाह ग्रुप में सामने आए हैं, उनका इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के फंड को निकालने के लिए मुखौटा कंपनी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।

ये सभी कंपनियां ओखला के उसी पते पर पंजीकृत थी, जो यूनिवर्सिटी के संचालित करने वाले ट्रस्ट का पता है।

छापेमारी में और क्या-क्या मिला?

छापे के दौरान इन कंपनियों के वास्तविक क्रियाकलापों के कोई सबूत नहीं मिले। इसके साथ ही इन कंपनियों को पंजीकृत कराने के लिए एक समान मोबाइल नंबर और ईमेल के उपयोग किया गया था।

इन कंपनियों द्वारा कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि में पैसा जमा कराने के दस्तावेज भी पूरे नहीं हैं। इससे अधिकतर कर्मचारियों के वेतन नकद में दिये जाने के संकेत मिलते हैं।

अल फलाह यूनिवर्सिटी पर नैक और यूजीसी से मान्यता मिलने के गलत दावा भी आरोप है और दिल्ली पुलिस इसकी जांच कर रही है।

ईडी के छापे में इस संबंध में पुख्ता सबूत मिलने के संकेत मिले हैं। सूत्रों के दौरान छापे के दौरान मिले सबूतों के आधार पर उसके प्रमोटरों व अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे ईडी के सवालों का सही से जवाब नहीं दे रहे हैं।

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