Holika Dahan 2026: होलिका दहन की परिक्रमा क्यों मानी जाती है आवश्यक? जानें सही विधि और नियम…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

 हिंदू धर्म में होली का पावन पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस साल 3 मार्च 2026 ( Holika Dahan 2026 Date) को रंगों वाली होली खेली जाएगी, लेकिन उससे पहले 2 मार्च की शाम को होने वाला होलिका दहन बहुत खास है।

होलिका दहन की अग्नि को बहुत ही पवित्र और ऊर्जा से भरपूर माना गया है, जिसमें हमारे जीवन की नकारात्मकता को दूर करने की शक्ति होती है। बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि अग्नि की परिक्रमा करना केवल एक धार्मिक रीत नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के प्रति अपना आभार जताने और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने का एक तरीका भी है।

अक्सर हम देखते हैं कि होलिका दहन के बाद सभी लोग अग्नि के चारों ओर घूमते हैं। इसके पीछे छिपे धार्मिक कारणों और सही विधि को समझना बहुत जरूरी है, ताकि हम इस परंपरा का पूरा लाभ उठा सकें और अपने जीवन के संचालन को और भी सुखद बना सकें।

परिक्रमा की सही संख्या और उसका धार्मिक आधार

होलिका दहन के समय परिक्रमा (Holika Dahan Parikrama) की संख्या का बहुत महत्व होता है। आमतौर पर शास्त्रों के अनुसार अग्नि की तीन या सात बार परिक्रमा करना सबसे शुभ माना जाता है। तीन की संख्या को त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सम्मान में उत्तम माना जाता है, जबकि सात परिक्रमाएं हमारे जीवन के सात चक्रों की शुद्धि का संकेत देती हैं।

परिक्रमा करते समय मन में ईश्वर के प्रति धन्यवाद का भाव रखना चाहिए, जिससे हम उन सभी सुखों के लिए आभार व्यक्त कर सकें जो हमें मिले हैं। यह संख्या हमें अनुशासन और श्रद्धा की सीख देती है। सही संख्या में और शांत मन से की गई परिक्रमा मन के भीतर छिपे डर और आशंका को दूर करने में बहुत सहायक सिद्ध होती है, जिससे मानसिक बल मिलता है।

परिक्रमा के साथ दान और सेवा का महत्व

परिक्रमा पूरी होने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ न कुछ दान करना बहुत पुण्यकारी माना गया है। होलिका की अग्नि में नई फसल के अनाज या गेहूं की बालियों को अर्पित करना सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है। इससे घर में कभी अन्न और धन की कमी होने की आशंका नहीं रहती और बरकत बनी रहती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन किया गया दान ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करता है और सुखद फल मिलने का मार्ग बनाता है। जब हम सच्चे मन से दूसरों की मदद करते हैं और भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं, तो घर में हमेशा बरकत और खुशहाली बनी रहती है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि हम अपनी खुशियों को दूसरों के साथ साझा करें और जीवन में सहजता से आगे बढ़ें।

सुखद भविष्य के लिए परिक्रमा की सही विधि

  • परिक्रमा शुरू करने से पहले अपने हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान का ध्यान करना चाहिए।
  • शास्त्रों के अनुसार, अग्नि की परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में ही करनी चाहिए, इसे ही शुभ माना गया है।
  • परिक्रमा करते समय ‘ओम होलिकायै नमः’ जैसे सरल मंत्रों का जाप करना चाहिए, इससे मन को शांति मिलती है।
  • परिक्रमा पूरी होने के बाद अग्नि देव को हाथ जोड़कर प्रणाम करें और अपने परिवार की सुख-सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें।
  • विधि-विधान से की गई यह परिक्रमा पितरों का आशीर्वाद दिलाती है और पिता की संपत्ति व सुख में वृद्धि का मार्ग खोलती है।
  • यह छोटी सी परंपरा हमारे भविष्य के सही संचालन और बड़ी इच्छाएं पूरी करने में बहुत सहायक सिद्ध होती है।

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