एमसीसी को कानूनी रूप देने से चुनाव आयोग की शक्तियों में कमी आ सकती है, आदर्श आचार संहिता को लेकर भी दी गई राय…

विधि आयोग का कहना है कि चुनावों के दौरान आदर्श चुनाव आचार संहिता (माडल कोड आफ कंडक्ट-एमसीसी) को कानूनी रूप देने से इसे लागू करने में बाधा आएगी।

यह चुनाव आयोग की शक्तियों को कमजोर कर सकता है और स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध चुनावों के लिए भी यह ठीक नहीं होगा।

संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) जोकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए समान चुनाव कराने के विधेयकों की जांच कर रही है, को दी गई अपनी राय में विधि आयोग ने कहा कि एमसीसी की सबसे बड़ी ताकत इसकी तुंरत सुधारात्मक कार्रवाई करने की क्षमता है।

चुनाव नियमों के उल्लंघन पर हो कार्रवाई

विधि आयोग ने कहा कि चुनाव सख्त समयसीमाओं में होते हैं और इसके उल्लंघन पर चंद दिनों या घंटों के भीतर यानी तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।

यदि एमसीसी वैधानिक हो जाता है तो उल्लंघनों के लिए औपचारिक कानूनी कार्यवाही शुरू होगी जो न्यायिक जांच की ओर ले जा सकती है।

विधि आयोग ने चेताया कि निर्णयात्मक प्रक्रिया हमेशा तुरंत कार्रवाई की जरूरत को पूरा नहीं कर सकती।

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने याद किया कि करीब 2001 में चुनाव आयोग ने चुनाव सुधारों के बारे में इसी तरह का ²ष्टिकोण दिया था।

विधि आयोग ने कहा कि वर्तमान प्रणाली चुनाव आयोग को अपने पूर्ण अधिकारों का उपयोग करके समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करने का अधिकार देती है।

एमसीसी को कानूनी रूप करने का प्रयास चुनाव आयोग की शक्तियों को कमजोर कर सकता है। कई विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा आचार संहिता के उल्लंघन को चुनाव आयोग द्वारा अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।

हालांकि, आयोग हमेशा यह कहता आया है कि इस संबंध में वह बिना किसी पक्षपात के कार्य करता है।

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