आज से चातुर्मास की शुरुआत, अगले 4 महीनों तक नहीं होंगे कोई मांगलिक कार्य…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

आषाढ़ शुक्लपक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी, पद्मनाभा एकादशी व देवशयनी एकादशी कहा जाता है।

देवशयनी एकादशी छह जुलाई को मनाई जाएगी। इसी दिन चतुर्मास का आरंभ होता है। रविवार से चार माह तक मांगलिक कार्य ठप रहेंगे। इस दौरान, विवाह, गृह प्रवेश, सगाई, मुंडन जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं होंगे।

ज्योतिर्विद पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि एकादशी शनिवार शाम 6:58 बजे से शुरू होकर रविवार की रात 9:14 बजे तक है।

रविवार को विशाखा नक्षत्र, साध्य योग और चंद्रमा तुला राशि में होंगे। इस दिन चराचर जगत के स्वामी श्री हरिविष्णु जी क्षीर सागर में शयन करते हैं। ज्योतिषचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि चार माह भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते है।

करीब चार माह मांगालिक कार्य नहीं किए जाते है। चार माह बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रबोधिनी एकादशी एक नवंबर को योग निद्रा से श्री हरि विष्णु जागेंगे।

ज्योतिषाचार्य आनंद दुबे ने बताया कि भगवान विष्णु के शयन अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। एकादशी व्रत में अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए।

बताया कि जुलाई माह व्रत त्योहार, धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इस माह गुरु पूर्णिमा, नागपंचमी और हरियाली तीज जैसे व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे।

जुलाई में ही सावन की शुरुआत होगी। भगवान भोलेनाथ को समर्पित सावन का महीना 11 जुलाई से शुरू होकर नौ अगस्त तक चलेगा।

सावन में चार सोमवार होंगे। पहला सोमवार व्रत 14 जुलाई, दूसरा 21 व तीसरा 28 जुलाई और चौथा चार अगस्त है। पहले सोमवार को गजानन संकष्टी चतुर्थी का संयोग और आयुष्मान योग भी बन रहा है।

चातुर्मास के दौरान भगवान शिव का पूजन किया जाना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास में सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं।

इस दौरान भगवान शिव की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। चातुर्मास में ही भगवान शिव का पवित्र माह सावन भी पड़ता है।

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