डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार वाइट हाउस में आने के कुछ समय बाद ही भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव आ रहा है।
व्यापारिक समझौते को लेकर दोनों सरकारों के बीच में अभी भी वार्ता चल रही है। वहीं, दूसरी और रूस से तेल खरीद के चलते ट्रंप प्रशासन ने भारत पर टैरिफ लगा रखा है।
अमेरिकी सरकार की भारत के खिलाफ जारी इन नीतियों की पूर्व अमेरिकी वाणिज्य मंत्री जीना रायमोंडो ने आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की नीतियां वैश्विक स्तर पर अमेरिका की स्थिति को नुकसान पहुंचा रही हैं।
पिछले हफ्ते हावर्ड केनेडी स्कूल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए रायमोंडों ने ट्रंप प्रशासन की सबसे गंभीर गलतियों का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने अमेरिका के सभी सहयोगियों को नाराज कर दिया है। अमेरिका को ग्रेट बनाने की नीति अलग है लेकिन अकेले अमेरिका की नीति विनाशकारी है।
रायमोंडो ने कहा, “इस प्रशासन की जिन 20 प्रमुख बातों के लिए मैं आलोचना करूंगी। उनमें से एक यह है कि इन्होंने हमारे सभी सहयोगियों को नाराज कर दिया है। अमेरिका पहले की नीति एक बात है, लेकिन अमेरिका को अकेला कर देना विनाशकारी है।”
पूर्व अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि एक मजबूत अमेरिका के लिए यूरोप, जापान और दक्षिण पूर्व एशिया के साथ एक मजबूत साझेदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जापान, कोरिया और एशिया के अन्य हिस्सों के साथ संबंधों को मज़बूत करने के लिए और भी बहुत कुछ किया जा सकता है।
रायमोंडो ने भारत का जिक्र करते हुए कहा कि हम भारत एक ऐसा देश है, जिसके साथ हम ट्रंप प्रशासन की गलती को सार्वजनिक रूप से देख सकते हैं। उन्होंने कहा, “भारत, मुझे लगता है कि हम भारत के साथ एक बड़ी गलती कर रहे हैं। तो आखिरकार यही हुआ।”
गौरतलब है कि ट्रंप द्वारा मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के बाद से ही रिश्तों में तनाव बढ़ रहा है। उस समय पर ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से अपनी मध्यस्थता में सीजफायर की बात कही थी।
पाकिस्तान ने इस दावे को हाथों हाथ लिया था, जबकि भारत ने इस को सिरे से खारिज किया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने सबसे पहले भारतीय वस्तुओं के ऊपर 25 फीसदी टैरिफ लगाया।
इतना ही नहीं ट्रंप ने इसके बाद रूसी तेल खरीद को लेकर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ का भी ऐलान कर दिया। वर्तमान में अमेरिका में बिकने वाली भारतीय वस्तुओं के ऊपर 50 फीसदी टैरिफ लगा हुआ है।
भारत की तरफ से ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को पूरी तरह से अनुचित और अतार्किक बताया गया है। हालांकि ट्रंप के 25 फीसदी फैसले के बाद भी भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा है।