इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल (आइजीएमसी) शिमला के डॉक्टरों के नाम एक और उपलब्धि जुड़ी है। डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर कैंसर पीड़ित मरीज को राहत दी है।
अस्पताल के सर्जरी विभाग ने पेट के कैंसर से पीड़ित शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के ननखड़ी की महिला मरीज शन्ना देवी का ऑपरेशन कर पेट का 90 प्रतिशत हिस्सा लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक से हटाकर उसे छोटी आंत से जोड़ा।
यह ऑपरेशन लगभग छह घंटे तक चला। अस्पताल प्रशासन के अनुसार इससे पहले आइजीएमसी में लेप्रोस्कोपिक तकनीक से पेट का अधिकतम 50 प्रतिशत हिस्सा हटाने तक की सर्जरी की गई थी।
44 वर्षीय महिला मरीज छह माह से पेट के कैंसर से जूझ रही थी। इससे उसके वजन में कमी और भोजन पाचन की दिक्कत बढ़ रही थी।
महिला अस्पताल पहुंची तो एडवांस स्टेज गैस्ट्रिक कैंसर की पुष्टि हुई। इसके बाद विशेषज्ञ सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों और नर्सिंग स्टाफ की टीम गठित की और ऑपरेशन किया।
आइजीएमसी के एमएस डॉ. राहुल राव और आइजीएमसी के सर्जन डॉ. वेद कुमार शर्मा ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक तकनीक से इतने बड़े हिस्से का ऑपरेशन करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था।
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है। दो फरवरी को आपरेशन किया था और 10 फरवरी को मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
टीम में उनके साथ डॉ. विपिन शर्मा, डॉ. आशीष व डॉ. अरुण कुमार सहित अन्य शामिल रहे। इस तरह का आपरेशन करने वाला आइजीएमसी प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल बना है।
क्या है लेप्रोस्कोपी तकनीक
लेप्रोस्कोपी आधुनिक सर्जिकल तकनीक है। इसे आम भाषा में दूरबीन से आपरेशन भी कहा जाता है। इसमें शरीर को बड़े चीरे से खोलने के बजाय बहुत छोटे-छोटे छेद (आमतौर पर 0.5 से एक सेंटीमीटर) करके आपरेशन किया जाता है।
लेप्रोस्कोपी में कम दर्द होता है, खून कम बहता है और संक्रमण का खतरा कम होने से मरीज जल्दी ठीक होता है। अस्पताल में कम दिन रहना पड़ता है।
शरीर पर निशान बहुत छोटे रहते हैं। सामान्य सर्जरी में बड़े चीरे की आवश्यकता होती है। इससे दर्द ज्यादा होने के साथ रिकवरी में भी ज्यादा समय लगता है।
हिमाचल में हाल में हुए बड़े ऑपरेशन
- 10 फरवरी, 2026 को डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा के डॉक्टरों ने 10 वर्षीय बच्चे के पैर के जटिल विकार (इक्विनोकावोवरस) की सफल सर्जरी की।
- 31 जनवरी, 2026 को आइजीएमसी के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के डाक्टरों ने ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया से मरीज के गले में फंसी जोंक को निकाला।
- 17 अक्टूबर, 2025 को सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल चमियाणा (शिमला) के डाक्टरों ने युवती के गले (भोजन नली) में 15 साल से फंसे सिक्के को निकाला।