अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद यह उम्मीद जगी थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही जल्द सामान्य हो जाएगी, लेकिन हकीकत इसके उलट है।
अगले ही दिन जहाजों की संख्या बेहद कम रही और अधिकांश पोत खाड़ी क्षेत्र में ही रुके रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार समस्या जलडमरूमध्य के बंद या खुला होने की नहीं, बल्कि सुरक्षा जोखिम की है।हाल के हफ्तों में ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता और मंशा दोनों दिखाई हैं।
हमलों और धमकियों के कारण रोजाना करीब 130 जहाजों की आवाजाही घटकर गिने-चुने पोतों तक सीमित हो गई है।
क्या है जोखिम?
जब तक यह जोखिम कम नहीं होता, सामान्य आवागमन बहाल होना मुश्किल है।अमेरिका जहां जलडमरूमध्य को खुला बता रहा है, वहीं ईरान का रुख अस्पष्ट है। तेहरान की ओर से जहाजों को पहले सूचना देने जैसी बातों ने भ्रम बढ़ाया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल राजनीतिक बयानबाजी से जहाज संचालक जोखिम नहीं उठाएंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार स्थिति सुधारने के लिए दो चरण जरूरी हैं- पहला, खतरे को कम करना, जो सैन्य या कूटनीतिक प्रयासों से संभव है; दूसरा, भरोसे की बहाली। इसके तहत शुरुआती दौर में नौसैनिक गश्त, अंतरराष्ट्रीय निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की जरूरत होगी। 2019 में बने इंटरनेशनल मेरीटाइम सिक्योरिटी कंस्ट्रक्ट जैसे माडल को फिर लागू किया जा सकता है।
ईरान द्वारा जहाजों से अनुमति लेने या टोल लगाने की अटकलें भी चिंता बढ़ा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज एक वैश्विक जलमार्ग है, जहां सभी जहाजों को स्वतंत्र आवाजाही का अधिकार है। ऐसे किसी कदम का व्यापक विरोध हो सकता है और आर्थिक प्रतिबंधों का खतरा भी है।
बारूदी सुरंगों की आशंका
जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों की आशंका ने अनिश्चितता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट और सार्वजनिक आकलन जरूरी है, ताकि स्थिति को लेकर भरोसा बहाल हो सके।
विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि जहाज तभी लौटेंगे जब लगातार कुछ समय तक हमले न हों, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था मजबूत दिखे और वैश्विक समुद्री नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। तब तक जहाजों का इंतजार जारी रहेगा।