सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का दावा, बंगाल और तमिलनाडु में मतदाताओं के नाम काटने के आरोप राजनीति से प्रेरित…

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में बंगाल और तमिलनाडु में चल रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) का पुरजोर बचाव करते हुए कहा है कि वास्तविक मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में काटने के आरोप बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए हैं।

ये आरोप अंदाजे पर आधारित व राजनीति से प्रेरित हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने 11 नवंबर को द्रमुक, माकपा, कांग्रेस की बंगाल इकाई और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की याचिकाओं पर चुनाव आयोग से अलग-अलग जवाब मांगे थे। इन याचिकाओं में तमिलनाडु और बंगाल में एसआइआर की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट से याचिकाओं को खारिज करने की मांग

शीर्ष अदालत में अलग-अलग हलफनामे दाखिल करते हुए चुनाव आयोग के सचिव पवन दीवान ने याचिकाओं को खारिज करने की मांग की।

तृणमूल सांसद डोला सेन और अन्य की याचिकाओं पर 26 नवंबर को दायर 81 पृष्ठों के जवाबी हलफनामे में चुनाव आयोग ने कहा कि बंगाल में बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने के आरोप लगाने वाली बात को निहित राजनीतिक फायदे के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

बंगाल में 30 प्रतिशत तक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर होने के आरोपों को गलत बताते हुए आयोग ने बताया कि 99.77 प्रतिशत मौजूदा मतदाताओं को पहले से भरे हुए गणना प्रपत्र दिए जा चुके हैं और 70.14 प्रतिशत प्रपत्र वापस मिल गए हैं। ये आंकड़े दिखाते हैं कि याचिकाकर्ताओं ने बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए हैं।

तमिलनाडु में चुनाव आयोग ने किया SIR का बचाव

दो अलग-अलग हलफनामों में आयोग ने तमिलनाडु में एसआइआर का बचाव किया। साथ ही कहा कि इस राज्य में भी मतदाताओं के नाम काटे जाने के दावे बढ़ा-चढ़ाकर किए गए हैं।

इस बीच शीर्ष अदालत अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व वाली पार्टी टीवीके की तमिलनाडु में एसआइआर को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गया है। इस याचिका पर चार दिसंबर को सुनवाई होगी। 

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