दिवाली 2025 मुहूर्त: 21 अक्टूबर को मात्र 12 मिनट रहेगा प्रदोष काल, जानें शुभ पूजन का सही समय…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

वैदिक पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में मनाया जाने वाला दीपोत्सव का पंचदिवसीय पर्व इस बार 18 से 23 अक्टूबर तक रहेगा।

हालांकि इस वर्ष दीपावली और गोवर्धन पूजा की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिसे मेरठ के ज्योतिषाचार्यों ने दूर कर दिया है।

उनका कहना है कि इस वर्ष मुख्य दीपावली यानी महालक्ष्मी पूजा 20 अक्तूबर सोमवार को ही होगी, क्योंकि इस दिन अमावस्या प्रदोष और निशीथ काल में व्याप्त रहेगी।

ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत के अनुसार दीपावली के पंचदिवसीय पर्व में इस बार एक रिक्त दिन भी उपस्थित रहेगा। यही कारण है कि कई लोग 20 या 21 अक्तूबर को लेकर असमंजस में हैं।

उन्होंने बताया कि शास्त्रानुसार बड़ी दीपावली उसी दिन होती है, जब अमावस्या तिथि प्रदोषकाल और रात्रिकाल दोनों में हो। इस बार अमावस्या 20 अक्तूबर को दोपहर 3:44 बजे शुरू होकर 21 अक्टूबर को शाम 5:54 बजे तक रहेगी।

प्रदोषकाल और रात्रिकाल दोनों में अमावस्या 20 को ही रहेगी, अतः महालक्ष्मी पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त इसी दिन है। इसके अलावा मुख्य रूप से प्रदोषकाल और रात्रिकाल में अमावस्या केवल 20 को ही रहेगी, इसलिए बड़ी दीपावली (महालक्ष्मी पूजा) 20 को करना ही श्रेष्ठ है।

21 अक्तूबर को देखें तो दिनभर तो अमावस्या रहेगी लेकिन संध्याकाल में अमावस्या समाप्त हो जाएगी।

सूर्यास्त के बाद प्रदोषकाल में केवल लगभग 12 मिनट के लिए ही अमावस्या रहेगी और रात्रिकाल में तो अमावस्या है ही नहीं। बिना अमावस्या के बड़ी दीपावली पूजन श्रेष्ठ नहीं माना जाता।

शुभ योग भी 20 अक्तूबर को है

ज्योतिषाचार्य रुचि कपूर के अनुसार दीपावली रात्रि का पर्व है और जब अमावस्या तिथि प्रदोष व निशीथ काल में हो तभी लक्ष्मी पूजन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

इस वर्ष ऐसा शुभ योग 20 अक्तूबर को ही बन रहा है। दीपावली को प्रदोष काल और स्थिर लग्न का शुभ संयोग भी है, जोकि माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत उत्तम माना जाता है।

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