तेल की बढ़ती कीमतों से फायदा उठाने की तैयारी में अमेरिका? ट्रंप के कथित ‘सीक्रेट प्लान’ की चर्चा तेज…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि बढ़ती तेल कीमतों से अमेरिका को आर्थिक फायदा हो सकता है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।

उन्होंने ईरान को ‘ईविल एम्पायर’ यानी बुरी ताकत बताया और कहा कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल करता है तो इससे पूरे मध्य पूर्व और दुनिया की स्थिरता को खतरा हो सकता है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, इसलिए तेल की कीमतें बढ़ने पर अमेरिका को ज्यादा कमाई होती है।

परमाणु हथियार पर सख्त रुख

ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति के तौर पर उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार न बना सके।

उन्होंने कहा कि वह ऐसा कभी होने नहीं देंगे और जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाए जाएंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के साथ चल रहा युद्ध 13वें दिन में पहुंच चुका है।

एक दिन पहले ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। उनके मुताबिक अमेरिकी सेना ने तेहरान की सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुंचाया है।

समाचार वेबसाइट एक्सियोस से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान में अब लगभग कोई बड़ा लक्ष्य बाकी नहीं बचा है। उन्होंने कहा, “जब मैं चाहूंगा, यह युद्ध खत्म हो जाएगा।” ट्रंप के अनुसार यह संघर्ष उम्मीद से ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहा है।

युद्ध पर भारी खर्च

रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के पहले ही हफ्ते में अमेरिका करीब 11.3 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार यह जानकारी पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस को दी है।

हालांकि इस अनुमान में कई बड़े खर्च शामिल नहीं हैं, जैसे हमले से पहले क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिकों, विमान और नौसैनिक जहाजों की तैनाती।

तेल बाजार पर असर

इस युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। गुरुवार को तेल की कीमतें कुछ समय के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर चली गईं। इसका एक बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने कहा कि मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा पैदा कर रहा है। स्थिति को संभालने के लिए एजेंसी के सदस्य देशों ने अपने रणनीतिक भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक कदम है।

फिर भी ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से आमतौर पर दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है और ईरान की जवाबी कार्रवाइयों के बाद यह मार्ग लगभग बंद हो गया है।

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