यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ कई राज्यों में प्रदर्शन, एससी-ओबीसी छात्रों ने भी जताया विरोध…

यूजीसी के नए नियमों का विरोध तेज होता जा रहा है। बुधवार को भी कई राज्यों में इसके खिलाफ प्रदर्शन हुए।

उत्तर प्रदेश में कई जगह भाजपा कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया तो दिल्ली में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में जोरदार प्रदर्शन हुआ।

खास बात यह रही कि डीयू में एससी-ओबीसी वर्ग के छात्र भी सवर्ण छात्रों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए और इसे विश्वविद्यालय की समरसता के लिए घातक बताया।

सबसे ज्यादा विरोध उत्तर प्रदेश में हो रहा है

इस मुद्दे को लेकर सबसे ज्यादा विरोध उत्तर प्रदेश में हो रहा है। लखनऊ स्थित केजीएमयू में चिकित्सकों ने कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

कहा, इलाज करते समय हम मरीज की जाति नहीं पूछते हैं। राष्ट्रीय छात्र पंचायत के पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज में प्रदर्शन किया।

वाराणसी में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्रों के प्रदर्शन के कारण वाहनों की लंबी कतार लग गई। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया।

मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों, करणी सेना और भारतीय किसान मजदूर संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने शहर में शांतिपूर्ण रैली निकालने की कोशिश की पर पुलिस ने परिसर तक ही सीमित कर दिया।

 प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखा 

कौशांबी में छात्र अभिषेक पांडेय और मुजफ्फरनगर में अंकुर राणा ने विरोध में प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखा है। देवरिया में कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के बाद लोगों की भीड़ ने गोरखपुर-देवरिया मुख्य मार्ग जाम कर दिया। बदायूं में भाजपा के बूथ अध्यक्ष सुमित गुप्ता व केशव मिश्रा ने पद से त्यागपत्र दे दिया।

पीलीभीत में सिर मुंडवाकर विरोध प्रकट किया गया। राजस्थान के जोधपुर में सवर्ण समाज ने एक फरवरी को जोधपुर बंद का आह्वान किया है। हिमाचल प्रदेश में भी यूजीसी के नए नियमों के विरोध में प्रदर्शन हुए।

शिमला में देवभूमि क्षत्रिय संगठन व राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी ने हथकड़ी व जंजीरें बांधकर प्रदर्शन किया और भाजपा के प्रदेश कार्यालय का किया घेराव करने के साथ हिमाचल बंद करने की चेतावनी दी।

हमीरपुर में राजपूत महासभा व सवर्ण समाज ने रैली निकाली और राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इस बीच, राज्य के राजस्व एवं जनजातीय विकास विभाग मंत्री जगत सिंह नेगी ने विरोध प्रदर्शन को भाजपा प्रायोजित बताया है तो लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य ¨सह ने इंटरनेट मीडिया के जरिये इस मुद्दे लोगों की राय मांगी है।

एससी व ओबीसी छात्रों ने कहा, किसी ने नहीं पूछी जाति

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में प्रदर्शन में शामिल विधि संकाय के ओबीसी वर्ग के छात्र संदीप कुमार ने कहा कि आज तक न तो किसी छात्र ने और न ही किसी शिक्षक ने उनसे उनकी जाति पूछी। मेरे नाम से कभी स्पष्ट नहीं हुआ कि मैं किस श्रेणी से आता हूं। विश्वविद्यालय में हम सब एक साथ पढ़ते, खाते और चर्चा करते हैं। लेकिन समता के नाम पर लाया गया यह कानून विषमता व भेदभाव को बढ़ावा देगा।

एससी वर्ग से आने वालीं छात्रा साक्षी ने कहा, मेरी चिंता यह है कि इस नए यूजीसी विधेयक के बाद कहीं ऐसा न हो कि आपसी संवाद और मित्रता की जगह संदेह व वर्गीकरण हावी हो जाए। ओबीसी वर्ग से ही आने वाले पीएचडी के छात्र शुभम ने भी चिंता जताई कि नए नियम जातिगत विभाजन को एक ठोस आधार देने का काम करेगा।

मायावती ने यूजीसी के नए नियम का किया समर्थन

बसपा प्रमुख मायावती ने यूजीसी के नए नियमों का समर्थन किया है। उन्होंने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लिखा कि यूजीसी के इक्विटी कमेटी (समता समिति) बनाने के नए नियम का सामान्य वर्ग के केवल जातिवादी मानसिकता वाले लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है, जो कतई उचित नहीं है।

उन्होंने यह भी लिखा है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने से पहले यदि सभी लोगों को विश्वास में ले लिया जाता तो बेहतर होता, ऐसे में यह देश में सामाजिक तनाव का कारण नहीं बनता। इस तरफ भी सरकार और सभी संस्थानों को जरूर ध्यान देना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *