ऑपरेशन सिंदूर में भारत के ऐक्शन से चारों खाने चि पाकिस्तान बिलबिलाया हुआ है।
इस बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर जहर उगला है।
गुरुवार को भारत के खिलाफ विवादित बयान देते हुए ख्वाजा ने कहा कि भारत की हालिया कार्रवाईयों से शिमला समझौते की “पवित्रता” समाप्त हो चुकी है। उन्होंने यह बयान जियो न्यूज को इंटरव्यू देते हुए दिया।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद से ख्वाजा आसिफ कई बार असंगत और उकसावे वाले बयान दे चुके हैं। अब उन्होंने इशारा किया है कि पाकिस्तान शिमला समझौते को रद्द करने पर विचार कर सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है, तो नियंत्रण रेखा (LoC) अब केवल “सीजफायर लाइन” रह जाएगी।
क्या है शिमला समझौता?
शिमला समझौता 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद 1972 में दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित हुआ था। इसमें यह तय किया गया था कि भारत और पाकिस्तान अपने विवादों को द्विपक्षीय ढंग से और शांतिपूर्वक हल करेंगे। विश्व बैंक या किसी तीसरे पक्ष की भूमिका इसमें नहीं थी।
पहलगाम हमले के बाद हालात बिगड़े
भारत में हुए भयावह पाहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 7 मई को आतंकवादी ठिकानों पर सटीक सैन्य कार्रवाई की।
इसके जवाब में पाकिस्तान ने 8, 9 और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की, लेकिन भारत ने हर बार कड़ा जवाब दिया।
बातचीत से टला तनाव
हालात को काबू में लाने के लिए दोनों देशों के सैन्य अभियानों के प्रमुखों (DGMO) के बीच 10 मई को बातचीत हुई, जिसके बाद सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमति बनी।
अब जबकि पाकिस्तान की ओर से शिमला समझौते को रद्द करने की धमकी दी गई है, यह भारत-पाक रिश्तों में एक और तनावपूर्ण मोड़ हो सकता है।
हालांकि, अभी तक पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से इस ऐतिहासिक समझौते को रद्द नहीं किया है।