बिजली विभाग का स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। स्थिति ऐसी हो गई है कि रीडिंग में मैराथन दौड़ लगाने के बीच प्रीपेड मीटर के अचानक स्मार्ट झटके से उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाला जा रहा है।
अधिकारी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश में लगे
परेशान और हताश उपभोक्ताओं ने अब विद्युत अधिकारियों से ओवर-स्मार्ट मीटर के झंझट से त्वरित पोस्टपेड राहत देने की गुहार लगाई है, लेकिन अधिकारी बहाने और लापरवाही को अमलीजामा पहनाकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश में लगे हैं।
स्टपेड मीटर की राहत मांग रहे
उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतों पर सरकार ने स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को फिलहाल बंद कर दिया है। मगर जिले में 40 हजार से ज्यादा स्मार्टमीटर के उपभोक्ताओं को अभी तक मरहम लगाने की इंतजार है।
सेक्टर-34, सेक्टर-62, सेक्टर-11 और अन्य विभिन्न सेक्टरों के उपभोक्ता खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनका आरोप है कि स्मार्ट तरीके से परेशानी झेलकर वह अब थक चुके हैं। उन्हें अपने भविष्य के लिए जेब सुरक्षित करते हुए घर को रोशन करने के लिए पोस्टपेड मीटर की राहत चाहिए।
विद्युत विभाग के स्मार्ट मीटर का खामियाजा सबसे ज्यादा बुजुर्गों को हो रहा है। उन्हें न तो मीटर रिचार्ज करने के लिए ऐप डाउनलोड कर उसे चलाना आता है और अचानक बिजली होने पर सर्वर डाउन की जिल्लत के साथ दोहरी मार झेलनी पड़ती है।