प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
हिंदू कैलेंडर में अमावस्या की तिथि का अपना ही एक अलग और गहरा महत्व है।
लेकिन, जब बात चैत्र अमावस्या (Chaitra Amavasya 2026) की आती है, तो इसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है।
यह दिन पितरों को प्रसन्न करने और जीवन से नकारात्मकता दूर करने का सबसे बड़ा दिन माना जाता है।
मार्च 2026 की यह अमावस्या आपके लिए ‘पितृ दोष’ से मुक्ति और पुण्य कमाने का शानदार मौका लेकर आई है। आइए जानते हैं कि इस बार चैत्र अमावस्या कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और आपको इस दिन क्या करना चाहिए।
चैत्र अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में मार्च के महीने में पड़ने वाली अमावस्या तिथि की अवधि कुछ इस प्रकार रहेगी:
अमावस्या तिथि का प्रारंभ: 18 मार्च 2026, बुधवार सुबह 08:25 बजे से।
अमावस्या तिथि का समापन: 19 मार्च 2026, गुरुवार सुबह 06:52 बजे तक।
कब मनाएं चैत्र अमावस्या?
शास्त्रों में ‘उदया तिथि’ का विशेष महत्व होने के कारण, चैत्र अमावस्या 19 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। हालांकि, जो भक्त अमावस्या का उपवास रखना चाहते हैं या स्नान-तर्पण जैसे कार्य करना चाहते हैं, वे तिथि शुरू होने के कारण 18 मार्च से ही अपनी पूजा शुरू कर सकते हैं।
स्नान-दान का महामुहूर्त:
धार्मिक दृष्टि से 19 मार्च को स्नान और दान करना अत्यंत शुभ रहेगा।
ब्रह्म मुहूर्त: 19 मार्च, सुबह 05:42 से 07:12 बजे तक।
पितरों को प्रसन्न करने का सही समय
इस बार अमावस्या पर ‘चतुष्पद करण’ योग बन रहा है, जो पूर्वजों की पूजा के लिए बहुत शुभ है।
पितृ पूजा का सबसे सटीक समय: 18 मार्च (बुधवार) को सुबह 11:20 से दोपहर 01:30 बजे तक।
चैत्र अमावस्या का महत्व: क्यों है यह इतनी खास?
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र अमावस्या (Chaitra Amavasya Significance) वह दिन है जब हम अपने उन पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं जो अब हमारे बीच नहीं हैं।
- अगर आपके कामों में बार-बार अड़चनें आती हैं, तो इस दिन तर्पण करने से पितृ दोष (Pitru Dosha) शांत होता है।
- यह दिन मन के अंधेरे और जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।
- इस दिन किया गया दान कई गुना फलदायी होता है और इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
इस दिन क्या करें और क्या न करें?
- सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। अगर नदी पर नहीं जा सकते, तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें।
- पितरों के नाम से काले तिल मिलाकर जल अर्पित करें। किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को अन्न (चावल, दाल, आटा) और वस्त्रों का दान करें।
- शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाएं। ऐसा माना जाता है कि पीपल में पितरों का वास होता है।
- घर के मंदिर में भगवान विष्णु (Vishnu Puja) और लक्ष्मी जी की पूजा करें।
पितृ शांति और सौभाग्य के लिए अचूक उपाय
- इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना ‘अमृत स्नान’ के समान फल देता है।
- अगर नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाएं। स्नान करते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का शांत मन से जप करें।
- स्नान के बाद पूर्वजों के निमित्त काले तिल और जल से तर्पण करें। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार को खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं।
- शाम के समय घर के मुख्य द्वार और दक्षिण दिशा में दीपक जलाना न भूलें, यह पितरों को मार्ग दिखाने वाला माना जाता है।