सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के विभिन्न विभागों में ओबीसी के होल्ड पदों के मामले में अभ्यर्थियों को हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश व न्यायमूर्ति एनके सिंह की युगलपीठ ने याचिका में हस्तक्षेप से मना करते हुए उक्त व्यवस्था दी।
दरअसल, पूर्व में हाई कोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई से मना कर दिया था। जबलपुर निवासी भावना यादव, शिवपुरी निवासी शक्ति पाल, रतलाम निवासी विजेंद्र सिंह व अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व वरुण ठाकुर ने पक्ष रखा।
कोर्ट में क्या दलील दी गई?
उन्होंने दलील दी कि ये मामला प्राथमिक शिक्षक भर्ती से जुड़ा है। दरअसल, महाधिवक्ता के अभिमत के आधार पर ओबीसी के 13 प्रतिशत पद होल्ड कर दिए गए थे।
दलील दी गई कि जिस याचिका के तहत इनके पद होल्ड करने के आदेश हुए थे, वो 28 जनवरी, 2025 को निरस्त हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने दी स्वतंत्रता
सुप्रीम कोर्ट से भी वह याचिका निरस्त हो चुकी है। हाई कोर्ट से याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी है।