नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध सरकारी क्षेत्र की शीर्ष 30 कंपनियों (पीएसयू) की विशेष ऑडिट की तैयारी की है।
इस ऑडिट का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ईएसजी) मानदंडों के अनुपालन को परखना है। इसमें 18 गैर-सूचीबद्ध सरकारी कंपनियों की भी गहन जांच होगी।
कैग खास तौर पर यह देखेगा कि पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करने में सरकारी कंपनियां कितनी मुस्तैद हैं।ई यानी एनवायर्नमेंट (पर्यावरण) के तहत कंपनियों की कार्बन उत्सर्जन, जल प्रबंधन, वन संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण नीतियों की जांच होगी।
एस यानी सोशल (सामाजिक) पहलू में कर्मचारी कल्याण, लैंगिक समानता और सामुदायिक विकास योजनाओं का मूल्यांकन किए जाने की संभावना है। जी यानी गवर्नेंस (शासन) में बोर्ड संरचना, भ्रष्टाचार रोकथाम और वित्तीय पारदर्शिता पर नजर रखी जाएगी।
कैग ने स्पष्ट किया कि यह आडिट डिजिटल टूल्स और थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन के माध्यम से की जाएगी और रिपोर्ट संसद की लोक लेखा समिति को सौंपी जाएगी। यह घोषणा ऐसे समय की गई है, जब भारत में ईएसजी अनुपालन को लेकर वैश्विक दबाव बढ़ रहा है।
सेबी के व्यावसायिक उत्तरदायित्व और स्थिरता रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क के तहत शीर्ष एक हजार सूचीबद्ध कंपनियों के लिए ईएसजी डिस्क्लोजर अनिवार्य है। लेकिन, कई पीएसयू को इससे छूट प्राप्त है।
जुलाई, 2025 में कैग की रिपोर्ट से पता चला है कि 20 दिग्गज पीएसयू में महिलाओं के निदेशक न होने और बोर्ड संरचना में खामियां हैं। इससे इनकी कारपोरेट गवर्नेंस पर सवाल उठे हैं।
डिप्टी कैग एएम बजाज ने बताया कि इस तरह की ऑडिटिंग से सरकारी कंपनियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और शासन को लेकर इनका रिकार्ड बेहतर होगा। साथ ही भारत के सतत विकास लक्ष्यों को मजबूत करने में यह कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है।