“‘नाक से खून, उल्टियां और सिर फटने जैसा दर्द’ -मादुरो के गार्ड ने वेनेजुएला पर हुए अटैक की दास्तान सुनाई”…

3 जनवरी की रात को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर धावा बोला और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है।

महज आधे घंटे में मिशन पूरा करके अमेरिकी विमानों ने न्यूयॉर्क के लिए उड़ान भर ली। मगर, अमेरिका के लिए ये सब इतना आसान कैसे हुआ?

वेनेजुएला पर अमेरिकी एक्शन के बाद सभी के मन में ये सवाल है कि आखिर कैसे अमेरिकी सेना चंद मिनटों में मादुरो तक पहुंच गई? क्या मादुरो के आसपास बॉडीगार्ड्स और सुरक्षाबल मौजूद नहीं थे? क्या राष्ट्रपति आवास के आसपास कोई रक्षा उपकरण नहीं थे?

व्हाइट हाउस ने शेयर किया वीडियो

अमेरिकी ऑपरेशन के दौरान मौके पर तैनात वेनेजुएला के सुरक्षाबलों ने इस पूरे ऑपरेशन का खुलासा किया है। मादुरो के गार्ड ने ही अमेरिकी कार्रवाई से पर्दा उठाया है, जिसे खुद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी शेयर किया है।

मादुरो का गार्ड ने सुनाई आपबीती

मादुरो के गार्ड के अनुसार, “वो एक नरसंहार था। राष्ट्रपति आवास में उस वक्त 500 से ज्यादा सैनिक मौजूद थे, लेकिन हम चाहकर भी कुछ नहीं कर सके। अमेरिकी सेना के विमान इतनी तेज रफ्तार से गोलीबारी कर रहे थे। ऐसा लग रहा था कि हर के सैनिक प्रति मिनट की रफ्तार से 300 गोलियां दाग रहा था।”

मादुरो के गार्ड ने दावा किया है कि काराकास में लैंडिंग से पहले किसी अजीब हथियार का इस्तेमाल किया गया था।

गार्ड के अनुसार

एक समय पर उन्होंने कुछ ऐसा लॉन्च किया, मुझे नहीं उसे कैसे परिभाषित करूं। वो जैसे बहुत तेज आवाज थी। उसे सुनने के बाद लगा जैसे मेरा सिर अंदर से फट जाएगा।

हमारी नाक से खून निकल रहा था। हम खून की उल्टियां करने लगे थे। सभी सैनिक जमीन पर गिर पड़े और हिलने में भी असमर्थ हो गए थे।

रडार ने काम करना बंद किया

मादुरो के गार्ड ने बताया, “हमें जहाजों के आने की आवाज तक सुनाई नहीं थी। हमारे रडार अचानक से बंद हो गए। इसके बाद भारी संख्या में ड्रोन हमारी तरफ बढ़ने लगे।

हमें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि हम अब क्या करें? इसके बाद लगभग 8 हेलीकॉप्टर में तकरीबन 20 अमेरिकी सैनिक आए, जो आधुनिक हथियारों से लेस थे। ऐसे हथियार हमने पहले कभी नहीं देखे।”

ywAAAAAAQABAAACAUwAOw==

अमेरिकी हमले में 100 लोगों की मौत

वेनेजुएला में आंतरिक मामलों के मंत्री डियोस्डाडो कैबेलो के अनुसार, अमेरिकी हमले में 100 लोगों की जान गई थी। वहीं, क्यूबा की सरकार ने भी छापेमारी के दौरान 32 नागरिकों की मौत की पुष्टि की है।

क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला का सहयोगी रहा है। वहीं, ट्रंप का दावा है कि इस स्ट्राइक में एक भी अमेरिकी सैनिक नहीं मारा गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *