प्रकृति के संरक्षण की तुलना में उसके विनाश पर दुनिया खर्च कर रही ज्यादा, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा…

संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि प्रकृति के संरक्षण के मुकाबले उसके विनाश पर दुनिया भारी खर्च कर रही है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा गुरुवार को जारी की गई ‘द स्टेट आफ फाइनेंस फॉर नेचर 2026’ रिपोर्ट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के बीच के खतरनाक असंतुलन को उजागर किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया प्रकृति को बचाने के लिए जितने पैसे निवेश कर रही है, उससे 30 गुना ज्यादा पैसा उसे नष्ट करने पर खर्च कर रही है।

निवेश का डरावना गणित : एक डॉलर बनाम 30 डॉलर रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष बताते हैं कि प्रकृति के संरक्षण में लगाए गए प्रत्येक एक डालर के मुकाबले, 30 डालर ऐसे कार्यों में खर्च किए जा रहे हैं जो पर्यावरण का विनाश करते हैं।

यह आंकड़े साल 2023 के डाटा पर आधारित हैं, जो भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं।

प्रमुख वित्तीय आंकड़े

7.3 ट्रिलियन डॉलर ऐसी गतिविधियों में लगे हैं जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाती हैं। 4.9 ट्रिलियन डॉलर निजी स्त्रोतों से आ रहे हैं, जो मुख्य रूप से ऊर्जा, उपयोगिता, औद्योगिक और बुनियादी सामग्री क्षेत्रों में केंद्रित हैं।

2.4 ट्रिलियन डॉलर की हानिकारक सब्सिडी दुनिया भर की सरकारों ने जीवाश्म ईंधन, कृषि, जल, परिवहन और निर्माण जैसे क्षेत्रों में दी है।

‘कोई बीच का रास्ता नहीं’

यूएनईपी की चेतावनी यूएनईपी की कार्यकारी निदेशक इंगेर एंडरसन ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ”यदि आप पैसे का पीछा करेंगे, तो आपको चुनौती की भयावहता समझ आएगी।

हम या तो प्रकृति के विनाश में निवेश कर सकते हैं या उसकी बहाली को शक्ति दे सकते हैं – इनके बीच का कोई रास्ता नहीं है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि जबकि प्रकृति-आधारित समाधानों के लिए वित्त पोषण बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहा है, वहीं विनाशकारी निवेश और सब्सिडी तेजी से बढ़ रहे हैं।

जर्मनी की आर्थिक सहयोग और विकास मंत्री रीम अलाबाली-राडोवन ने भी इस बात पर जोर दिया कि निजी क्षेत्र को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसे बचाने में निवेश करना चाहिए।

सुधार का नया मॉडल

‘नेचर ट्रांजिशन एक्स-कर्व’ रिपोर्ट में केवल समस्याओं का उल्लेख ही नहीं है, बल्कि समाधान के लिए ‘नेचर ट्रांजिशन एक्स-कर्व’ नामक एक नया ढांचा भी पेश किया गया है।

यह फ्रेमवर्क नीति निर्माताओं और व्यवसायों को दो मुख्य कार्यों में मदद करेगा

(1) हानिकारक सब्सिडी और विनाशकारी निवेशों को धीरे-धीरे खत्म करना;

(2) प्रकृति-आधारित समाधानों और प्रकृति-अनुकूल निवेशों को बड़े पैमाने पर बढ़ाना।

भविष्य की राह

ट्रिलियन डॉलर की प्रकृति अर्थव्यवस्था यूएन की यह रिपोर्ट ‘ट्रिलियन-डालर नेचर ट्रांजिशन इकानमी’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कुछ सफल उदाहरण भी साझा करती है।

इनमें शहरों में ‘हीट-आइलैंड’ प्रभाव को कम करने के लिए पौधों और पेड़ों का उपयोग; सड़क और ऊर्जा परियोजनाओं के डिजाइन में प्रकृति को शामिल करना; और कार्बन डाइआक्साइड का उपयोग करके ऐसे निर्माण सामग्री बनाना जो उत्सर्जन को कम करें – जैसी महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख किया गया है।

बहरहाल, इस रिपोर्ट का संदेश स्पष्ट है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को टिकाऊ बनाने के लिए निवेश को पर्यावरण के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके साथ मिलकर काम करना होगा।

किसी भी निवेश को स्थानीय पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भों पर आधारित होना चाहिए ताकि वह समावेशी और न्यायसंगत हो सके।

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