गैंगस्टर गडोली एनकाउंटर केस में बड़ा फैसला: मुंबई कोर्ट ने हरियाणा के पांच पुलिसकर्मियों समेत सभी आरोपियों को बरी किया…

मुंबई की एक अदालत ने शुक्रवार को हरियाणा पुलिस के पांच कर्मियों (एक तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर शामिल) और दो अन्य लोगों को बरी कर दिया।

इन सभी पर 2016 में मुंबई के एक होटल में गैंग्सटर संदीप गडोली के फर्जी एनकाउंटर का आरोप था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत काले ने आरोपितों को आइपीसी की धारा-302 (हत्या) और अन्य संबंधित प्रविधानों के तहत लगाए गए आरोपों में निर्दोष पाया।

गडोली की सात फरवरी, 2016 को अंधेरी ईस्ट के एक होटल में गुरुग्राम पुलिस की कथित गोलीबारी में मौत हो गई थी। इस कुख्यात गैंग्सटर पर एक लाख रुपये का इनाम था और 1999 से दर्ज की गईं 40 से अधिक एफआइआर में उसकी तलाश थी।

पुलिस ने इस हत्या के सिलसिले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें पांच पुलिसकर्मी, गडोली की ”गर्लफ्रेंड” (दिवंगत दिव्या पाहुजा), दिव्या की मां और विरोधी गिरोह का सरगना वीरेंद्र गुर्जर शामिल थे।

आरोपित पुलिसकर्मियों में प्रद्युमन यादव (तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर), विक्रम सिंह, जितेंद्र यादव, दीपक काकरान और परमजीत अहलावत शामिल थे।

पुलिस के अनुसार, पाहुजा की मदद से गडोली को एक जाल में फंसाया गया था और फिर एक फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया। पाहुजा के विरुद्ध चल रहा मामला बाद में समाप्त कर दिया गया क्योंकि 2024 में हरियाणा के एक होटल में उसकी हत्या कर दी गई थी। उस समय वह गडोली मामले में जमानत पर थी।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि वीरेंद्र गुर्जर की गडोली के साथ लंबे समय से दुश्मनी थी। उसने ही मुंबई के होटल में इस एनकाउंटर की पूरी योजना बनाई थी। उसने आरोपित पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर गडोली की हत्या की साजिश रची थी।

अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि आरोपित पुलिसकर्मियों ने अंधेरी ईस्ट के एक होटल में अवैध हथियारों का इस्तेमाल करके गडोली को गोली मारी थी और खुद को बचाने के लिए झूठे सुबूत पेश किए थे।

अभियोजन पक्ष ने 43 गवाहों की गवाही और व्यापक तकनीकी सबूत (सीसीटीवी फुटेज, काल रिकार्ड और बैलिस्टिक रिपोर्ट) पेश किए, ताकि यह साबित किया जा सके कि आरोपितों ने हत्या करने के लिए एक सुनियोजित साजिश के तहत काम किया था। हालांकि, न्यायाधीश ने सभी आरोपितों को बरी कर दिया। अदालत का यह आदेश अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

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