आधुनिक युद्ध अब सिर्फ मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहा है। इसके साथ साइबर हमले भी बड़े हथियार बनते जा रहे हैं।
हाल ही में ईरान से जुड़े एक हैकर समूह ने अमेरिका की एक बड़ी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी पर बड़ा साइबर हमला करने का दावा किया है।
बताया गया है कि इस हमले में करीब 2 लाख से ज्यादा कंप्यूटर, सर्वर और मोबाइल डिवाइस प्रभावित हुए। इस घटना से कंपनी के कई वैश्विक कामकाज भी कुछ समय के लिए रुक गए।
अमेरिकी कंपनी पर बड़ा साइबर हमला
Stryker नाम की अमेरिकी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी पर 11 मार्च को यह साइबर हमला हुआ। कंपनी का मुख्यालय मीचीगन में है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले के कारण कंपनी के हजारों कंप्यूटर सिस्टम प्रभावित हुए और उसके कई ऑपरेशन अस्थायी रूप से बंद हो गए। यह हमला उस समय हुआ जब ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच सैन्य तनाव बढ़ा हुआ है।
किसने ली हमले की जिम्मेदारी?
इस साइबर हमले की जिम्मेदारी ईरान से जुड़े हैकर समूह हंडाला हैक ने ली है। समूह ने कहा कि यह हमला मिनाब स्कूल पर हुए हमले का बदला है।
रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल के हमले में मिनाब के एक प्राथमिक स्कूल में करीब 180 बच्चों की मौत हो गई थी।
हैकर समूह का दावा है कि उन्होंने कंपनी का करीब 51 टेराबाइट डेटा चुरा लिया है। साथ ही उन्होंने 2 लाख से ज्यादा सिस्टम, सर्वर और मोबाइल डिवाइस को मिटा या खराब कर दिया।
समूह ने यह भी कहा कि उन्होंने वेरिफोन नाम की एक पेमेंट कंपनी को भी निशाना बनाया।
कौन है ‘हंडाला’ समूह?
साइबर सुरक्षा कंपनी चेक प्वाइंट के अनुसार ‘हंडाला हैक’ को ‘वॉइड मेंटिकोर’ नाम से भी ट्रैक किया जाता है।
माना जाता है कि यह समूह ईरान की खुफिया एजेंसी खुफिया और सुरक्षा मंत्रालय से जुड़ा हुआ है। इस समूह के अन्य नामों में रेड सैंडस्टॉर्म, बैनिश्ड किटन, कर्मा और होमलैंड जस्टिस शामिल हैं।
यह समूह ‘वाइपर अटैक’ नाम की तकनीक का इस्तेमाल करता है, जिसमें कंप्यूटर और सर्वर का डेटा मिटा दिया जाता है। हैकर पहले संवेदनशील जानकारी चुराते हैं और कभी-कभी उसे सार्वजनिक भी कर देते हैं।
कई बार यह समूह नकली ईमेल या सॉफ्टवेयर अपडेट भेजकर कर्मचारियों को धोखा देता है और सिस्टम तक पहुंच बना लेता है।
हैक्टिविस्ट से बड़ा साइबर नेटवर्क
हंडाला नाम फिलिस्तीनी कार्टून किरदार हैंडाला से लिया गया है, जिसे प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता है। यह समूह पहली बार 2023 के अंत में सामने आया था और शुरुआत में इसे फिलिस्तीन समर्थक हैक्टिविस्ट समूह माना गया था।
हालांकि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अब यह समूह ईरान सरकार से जुड़ा एक प्रमुख साइबर हथियार बन चुका है।