सेना दिवस पर आज पहली बार दिखेगी भैरव बटालियन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह परेड के साक्षी बनेंगे…

भारतीय सेना दिवस परेड गुरुवार को जयपुर में आयोजित होगी। पहला मौका होगा, जब यह छावनी क्षेत्र के बाहर आयोजित की जाएगी।

परेड में सेना की तोपखाने और राकेट क्षमताओं का भी प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें कई मिसाइल और लांचर प्रणालियों को दिखाया जाएगा। यह परेड भैरव बटालियन की पहली सार्वजनिक उपस्थिति को भी चिह्नित करेगी।

भैरव बटालियन का गठन आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया गया है, ताकि दुश्मनों के खतरों के खिलाफ त्वरित और सटीक आक्रामक समाधान प्रदान किया जा सके।

यह विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, मिजोरम के राज्यपाल जनरल वी.के.सिंह, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारी परेड के साक्षी बनेंगे।

परेड में सेना की तोपखाने और रॉकेट क्षमताओं का प्रदर्शन किया जाएगा। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और पिनाका मल्टी-बैरल राकेट लॉन्चर भी प्रदर्शित किए जाएंगे।

अन्य प्रणालियों में उन्नत बीएम-21 ग्रेड मल्टी-बैरल राकेट लांचर और स्मर्श प्रणाली शामिल होंगी, जो 300 मिमी कैलिबर के 12 रॉकेटों को 90 किलोमीटर तक की रेंज में फायर कर सकती है। उन्नत टोइड आर्टिलरी गन सिस्टम और एम777 अल्ट्रा-लाइट हावित्जर भी प्रदर्शन का हिस्सा होंगे।

एयर डिफेंस क्षमताओं में स्वदेशी आकाशतीर प्रणाली शामिल होगी, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उच्च-खतरे वाले वातावरण में पाकिस्तान द्वारा संचालित विभिन्न तुर्किये और चीनी मूल के ड्रोन सिस्टम को गिराकर प्रभावशीलता साबित की।

इग्ला मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम भी प्रदर्शनी का हिस्सा होंगे। परेड के दौरान यूनिवर्सल राकेट लॉन्चर सिस्टम प्रदर्शित होगा, जिसे सूर्यास्त्र के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष की सेना परेड यह भी दिखाएगी कि सेना युद्ध के मैदान में मानव और तकनीक को कैसे एकीकृत कर रही है।

सैनिकों को मानवरहित जमीनी वाहनों (यूजीवी) और ड्रोन के साथ टोही, सटीक हमले और रसद सहायता जैसी भूमिकाओं के लिए देखा जाएगा।

कई कामिकेज ड्रोन भी प्रदर्शित किए जाएंगे, जिनमें मिनी हार्पी, हारोप, पीसकीपर और स्काई स्ट्राइकर शामिल हैं।

त्रिनेत्र लाइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम भी प्रदर्शनी में शामिल होगा। पहली बार सेना अपनी नई सौर ऊर्जा से चलने वाली एमएपीएसएस मानवरहित हवाई वाहन प्रणाली भी प्रदर्शित करेगी।

रोबोटिक म्यूलेस, जिन्हें रोबो डाग भी कहा जाता है, जिन्होंने पिछली परेडों में ध्यान आकर्षित किया था, इस साल भी वापसी करेंगे। परेड में नेपाली सेना बैंड का विशेष दस्ता प्रस्तुति देगा।

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