सोशल मीडिया पर एक एक MBBS छात्र ने चौंकाने वाला दावा किया है। उसने बताया कि उसके ब्लूटूथ इयरफोन अचानक फट गए और इससे उसके कान के पर्दे में सूजन हो गई।
छात्र ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह आमतौर पर सामान्य वॉल्यूम पर सिर्फ 15 मिनट तक ही इयरबड्स इस्तेमाल करता था। लेकिन उस दिन उसे अपने कान में अचानक ड्रिलिंग मशीन जैसी तेज सनसनी महसूस हुई।
उसने कहा कि यह इयरफोन में आई किसी खराबी की वजह से हुआ। इस पोस्ट को देखते ही सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। कई लोगों ने अपनी चिंता जताई।
कुछ यूजर्स ने बताया कि उनके साथ भी ऐसे ही अनुभव हुए हैं।
इयरबड्स इस्तेमाल करने से फंगल इन्फेक्शन
एक व्यक्ति ने दावा किया कि ब्लूटूथ इयरबड्स इस्तेमाल करने से उसे फंगल इन्फेक्शन हो गया था। कई लोगों ने सलाह दी कि ऐसे जोखिमों से बचने के लिए वायर्ड इयरफोन का इस्तेमाल बेहतर है।
कुछ ने सुझाव दिया कि छात्र को कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। यह घटना इयरबड्स और हेडफोन्स के इस्तेमाल से जुड़े संभावित खतरे की ओर ध्यान खींच रही है।
सुनने की क्षमता पर बुरा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इयरबड्स को गलत तरीके से या लंबे समय तक तेज आवाज में इस्तेमाल करने से सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।
कान में किसी भी चीज को बार-बार डालना या तेज आवाज सुनना सुनने की समस्या का बड़ा कारण बन रहा है।
आजकल की व्यस्त जिंदगी में लोग अक्सर इयरबड्स लगाकर घंटों संगीत या वीडियो सुनते रहते हैं। इससे कान के नाजुक हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है। सुनने की क्षमता कम होने की दो मुख्य तरह होती हैं।
सुनने की क्षमता कम होने के मामले बढ़ रहे
पहली है कंडक्टिव हियरिंग लॉस, जिसमें बाहरी या मध्य कान प्रभावित होता है। दूसरी है सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस, जिसमें भीतरी कान या सुनने वाली नस को नुकसान पहुंचता है।
कुछ लोगों में सुनने की समस्या जन्मजात या आनुवंशिक कारणों से भी हो सकती है, जैसे ओटोस्क्लेरोसिस नाम की स्थिति, जिसमें मध्य कान की हड्डियां प्रभावित होती हैं।
आजकल युवाओं में भी सुनने की क्षमता कम होने के मामले बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण लंबे समय तक तेज आवाज वाले हेडफोन्स या इयरबड्स का इस्तेमाल माना जा रहा है।
इसलिए सलाह दी जाती है कि इयरबड्स का इस्तेमाल सीमित समय तक करें, वॉल्यूम कम रखें और अगर कोई असुविधा महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।