बांग्लादेश: शेख हसीना को एक और मामले में 5 साल की सजा, भतीजी, बहन और 14 अन्य पर भी कार्रवाई…

 बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को एक और मामले में सजा सुनाई गई है। देश की एक अदालत ने जमीन घोटाले में सोमवार को हसीना को पांच वर्ष और उनकी भतीजी व ब्रिटिश सांसद ट्यूलिप सिद्दीकी को दो वर्ष जेल की सजा सुनाई है।

पिछले महीने 78 वर्षीय हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध मामले में मौत की सजा, जबकि भ्रष्टाचार से जुड़े तीन अन्य मामलों में 21 साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

सरकारी न्यूज एजेंसी बीएसएस के अनुसार, ढाका की विशेष अदालत-4 के जज मोहम्मद रबीउल आलम ने इसी मामले में हसीना की बहन शेख रेहाना को सात वर्ष जेल की सुनाई है। भरी अदालत में तीनों की अनुपस्थिति में यह फैसला सुनाया गया।

यह मामला 17 लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था। 14 अन्य को पांच-पांच वर्ष जेल की सजा सुनाई गई है।

अदालत ने हसीना, रेहाना और सिद्दीकी समेत सभी दोषियों पर एक-एक लाख टका जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर छह महीने अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

डेली स्टार अखबार के मुताबिक, भ्रष्टाचार रोधी आयोग (एसीसी) की तरफ से दायर किए गए भ्रष्टाचार के मामलों में हसीना से जुड़ा यह चौथा फैसला है।

एसीसी ने गत 12 से 14 जनवरी के दौरान अपने ढाका एकीकृत जिला कार्यालय-1 में पूर्बाचल न्यू टाउन परियोजना के तहत भूखंड के आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर छह अलग-अलग मामले दायर किए थे।

एसीसी के अनुसार, हसीना ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके अपने और अपने बेटे साजीब वाजिद जाय, बेटी साइमा वाजिद पुतुल और बहन रेहाना समेत कई रिश्तेदारों के लिए गैर-कानूनी तरीके से छह भूखंड हासिल किए, जिनमें से प्रत्येक का आकार 7200 वर्ग फीट था।

जबकि मौजूदा नियमों के तहत वे इसके योग्य नहीं थे। ¨हसक छात्र आंदोलन के चलते पांच अगस्त, 2024 को हसीना की अगुआई वाली अवामी लीग सरकार अपदस्थ हो गई थी। उस समय से हसीना भारत में रह रही हैं।

इन मामलों में हो चुकी है सजा

18 नवंबर को देश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने हसीना को मौत की सजा सुनाई थी। यह सजा जुलाई-अगस्त, 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के आरोपों पर सुनाई गई थी।

जबकि 27 नवंबर को ढाका की विशेष अदालत-5 के जज ने भ्रष्टाचार के तीन मामलों में हसीना को 21 वर्ष जेल की सजा सुनाई थी। हालांकि इन मामलों में भी हसीना की अनुपस्थिति में फैसला सुनाया गया था।

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