Bangladesh Election: ‘पड़ोसी देशों से बेहतर संबंध, लेकिन…’ BNP के घोषणा पत्र में भारत पर रहमान का दोहरा रुख…

पड़ोसी देश बांग्लादेश में कल यानी 12 फरवरी को चुनाव होने वाले हैं। मतदान से पहले प्रचार का शोर थम गया है।

हर पार्टी आखिरी जोर अजमाइश में लगी हुई है। इस बीच तारिक रहमान की नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) इस बात को लेकर कन्फ्यूज्ड लग रही है कि पड़ोसी देशों के साथ किस तरह का रिश्ता रखना है।

BNP का पड़ोसी देशों से संबंधों पर दोहरा रवैया

पडोसी देशों के साथ संबंध पर BNP का दोहरा रवैया रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि BNP के मैनिफेस्टो में पड़ोसियों के साथ रिश्ते बेहतर करने और साथ मिलकर आगे बढ़ने की बात कही गई थी।

लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इसी घोषणापत्र में भारत का भी जिक्र है, जहां BNP ने उस पर बॉर्डर पर हत्याओं और पुश-इन का आरोप लगाया था, जिसे पार्टी ने रोके जाने की बात कही है।

BNP के घोषणापत्र में कहा गया है, ‘क्योंकि बांग्लादेश के लोगों पर कोई भी हमला मंज़ूर नहीं है, इसलिए बॉर्डर पर हत्याओं और पुश-इन समेत सभी गलत कामों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।’

दोस्ती का हाथ बढ़ा रही या धमकी दे रही है BNP?

भारत के बारे में BNP का नजरिया कन्फ्यूज्ड दिखने की एक और वजह रहमान का कुछ समय पहले पूर्व प्रधानमंत्री शेखा हसीना के खिलाफ दिया गया बयान है। BNP नेता, ने उन्हें और उनके शासन को भ्रष्ट और क्रूर कहा था।

बता दें, बांग्लादेश के एक स्पेशल ट्रिब्यूनल ने पिछले साल हसीना को उनकी गैरमौजूदगी में ट्रायल के बाद मौत की सज़ा सुनाई थी, जिसमें उन पर ‘जुलाई विद्रोह’ नाम के एक हिंसक विरोध को दबाने के लिए इंसानियत के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया गया था।

60 साल के रहमान को उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया की मौत के बाद BNP चीफ चुना गया है। दशकों से BNP की अहम सहयोगी रही जमात-ए-इस्लामी अब उसकी दुश्मन बन गई है।

यूनुस फैक्टर में कितना दम?

बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के चीफ मुहम्मद यूनुस ने लोगों से 12 फरवरी को आम चुनावों के साथ होने वाले रेफरेंडम में ‘हां’ वोट करने और उनके प्रस्तावित सुधार पैकेज का समर्थन करने की अपील की है। उन्होंने कहा, ‘अगर रेफरेंडम में ‘हां’ वोट जीतता है, तो बांग्लादेश का भविष्य ज्यादा पॉजिटिव तरीके से बनेगा।’

रेफरेंडम में ‘जुलाई नेशनल चार्टर-2025’ नाम के सुधार प्रस्तावों पर लोगों की सहमति मांगी गई, जिसकी घोषणा यूनुस ने 17 अक्टूबर को एक ड्रामे के साथ की थी। यह घोषणा राजनीतिक पार्टियों और नेशनल कंसेंसस कमीशन के बीच लंबी बातचीत के बाद की गई थी, जिसके वह हेड थे।

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