हथियार से हमला, अर्थव्यवस्था और मनोवैज्ञानिक दबाव: ईरान शांति वार्ता के मूड में नहीं, अब अमेरिका का ‘एग्जिट प्लान’ क्या होगा?…

ईरान के विरुद्ध छिड़ा युद्ध अपनी तमाम जटिलताओं और वैश्विक प्रभावों के बावजूद अब एक बुनियादी सवाल पर आकर टिक गया है – ‘दर्द सहने की सबसे ज्यादा ताकत किसमें है?’

यह युद्ध अब केवल मिसाइलों और बमों का खेल नहीं रह गया है, बल्कि यह मनोवैज्ञानिक और आर्थिक सहनशक्ति का एक ऐसा महत्वपूर्ण नाजुक मोड़ है जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे को पलक झपकते देखने का इंतजार कर रहे हैं।

तेजी से बढ़ती तेल की कीमतें

ईरान का सबसे घातक हथियार और अमेरिका की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर उभरी हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने की ईरान की क्षमता ने दुनिया भर के बाजारों में हलचल मचा दी है।

सोमवार को जब तेल की कीमतें 120 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को भी नरमी के संकेत देने पड़े।

हालांकि, उनकी बयानबाजी अभी भी ‘अंतिम विजय’ के संकल्प से भरी हुई है, लेकिन गैस की बढ़ती कीमतों और बाधित अंतरराष्ट्रीय व्यापार ने अमेरिका की पेशानी पर बल डाल दिए हैं।

मलबे में दबी उम्मीदें और मजबूत होती तानाशाही

ईरान के भीतर स्थिति अत्यंत कारुणिक है। इस्लामिक गणराज्य लगातार अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों को झेल रहा है, जिनका मुकाबला करने में वह तकनीकी रूप से अक्षम है।

ईरानी जनता, जो पहले से ही अपने शासकों के खिलाफ सड़कों पर थी, अब भारी बमबारी के बीच केवल जीवित रहने की जद्दोजहद कर रही है।

सड़कों पर तैनात सुरक्षा बल

किसी भी विद्रोह को दबाने के लिए मुस्तैद हैं। ईरान के लिए ‘विजय’ का अर्थ केवल सत्ता में बने रहना है, चाहे इसकी कीमत पूरा देश ही क्यों न चुकाए।

युद्ध की शुरुआत में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई का सत्ता संभालना इस संघर्ष को और अधिक कट्टरपंथी मोड़ दे चुका है।

मुजतबा को उनके पिता से भी अधिक सख्त माना जाता है, जिनके रिवोल्यूशनरी गार्ड के साथ गहरे संबंध हैं। दूसरी ओर, खाड़ी देश और इजरायल भी इस आग की आंच से अछूते नहीं हैं।

ईरानी मिसाइलों की बारिश ने इजरायली शहरों में सामान्य जीवन को ठप कर दिया है, जहां सायरन की गूंज अब रोजमर्रा का हिस्सा बन चुकी है। ‘होर्मुज’ की घेराबंदी और परमाणु आशंकाओं का साया ईरान ने अपनी वर्षों पुरानी धमकी को सच कर दिखाया है। दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार के मार्ग, ‘स्ट्रेट आफ होर्मुज’ में आवाजाही लगभग ठप है।

कतर और बहरीन के हालात बदतर

कतर और बहरीन जैसे ऊर्जा उत्पादकों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे चीन सहित एशियाई देशों में ऊर्जा संकट गहरा गया है। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान को ‘बीस गुना ज्यादा’ हमले की धमकी दी है, लेकिन तेहरान का रुख और भी कड़ा होता जा रहा है। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि वे फारस की खाड़ी से तेल की एक बूंद भी बाहर नहीं जाने देंगे।

इस युद्ध का सबसे खतरनाक पहलू ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। हालांकि अमेरिका ने जून में तीन परमाणु केंद्रों पर बमबारी की थी, लेकिन उच्च संवर्धित यूरेनियम का भंडार अभी भी मलबे के नीचे सुरक्षित माना जा रहा है। डर यह है कि नया नेतृत्व अपने पिता के पुराने फतवों को पलटकर परमाणु हथियार बनाने का आदेश दे सकता है।

फिलहाल, न तो अमेरिका के पास कोई स्पष्ट ‘एग्जिट प्लान’ है और न ही तेहरान शांति वार्ता के मूड में दिखाई दे रहा है। यह युद्ध अब उस मुकाम पर है जहां जीत का जश्न मनाने वाला कोई नहीं बचेगा, बस वही बचेगा जो सबसे अंत तक हार मानने से इन्कार कर दे।

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