ईरान पर अमेरिका और इजरायल की बमबारी के बाद शुरू हुए संघर्ष के साथ ही एक और मोर्चा तेजी से सक्रिय हो गया है सूचना युद्ध का।
इंटरनेट मीडिया पर बड़ी मात्रा में भ्रामक तस्वीरें और वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें से कई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) की मदद से तैयार किए गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इनका उद्देश्य युद्ध की वास्तविक स्थिति को प्रभावित करना और किसी पक्ष की सैन्य सफलता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना है।
प्रभावशाली प्रस्तुत करने की होड़
हाल ही में इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें लोगों की भीड़ एक ऊंची इमारत के शीर्ष से उठती आग, धुएं और मलबे को देखती दिखाई देती है।
इस वीडियो के साथ दावा किया गया कि बहरीन की एक गगनचुंबी इमारत पर ईरान ने मिसाइल हमला किया है। हालांकि बाद में जांच में स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो वास्तविक नहीं था, बल्कि एआइ तकनीक से तैयार किया गया था।
इसे ईरानी सरकार से जुड़े कुछ इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स द्वारा साझा किया गया था ताकि युद्ध में अपनी उपलब्धियों को अधिक प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया जा सके। वीडियो में कई ऐसे संकेत भी पाए गए जो इसके नकली होने की ओर इशारा करते हैं।
जैसे, क्लिप के बाईं ओर खड़ी दो कारें आपस में अस्वाभाविक रूप से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं, जबकि नीचे दाईं ओर खड़े एक व्यक्ति की कोहनी बैग के आर-पार जाती हुई नजर आती है, जो सामान्य परिस्थितियों में संभव नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार एआइ से तैयार वीडियो में इस तरह की ढृश्यात्मक त्रुटियां अक्सर देखी जाती हैं।
राज्य समर्थित प्रचार से बढ़ रहा भ्रम
पश्चिम एशिया में शुरू हुए महासंग्राम के बाद से इंटरनेट पर बड़ी संख्या में ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें घटनाओं को गलत तरीके से पेश किया गया है या पूरी तरह से गढ़ा गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह दुष्प्रचार अभियान खास तौर पर इस बात को लेकर चलाया जा रहा है कि युद्ध में किस पक्ष को बढ़त मिल रही है और वास्तविक क्षति कितनी हुई है।
रूस समर्थित नेटवर्क भी सक्रियरिपोर्ट के अनुसार रूस के ओवरलोड अभियान ने भी इस युद्ध से जुड़े भ्रामक वीडियो प्रसारित किए हैं।
यह नेटवर्क खुद को खुफिया एजेंसियों या समाचार संस्थानों जैसा दिखाकर लोगों के बीच डर और असुरक्षा की भावना पैदा करने की कोशिश करता है।
इंटरनेट बंदी से स्थिति और जटिल
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के अन्य संघर्षों जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष में भी भ्रामक वीडियो सामने आए थे, लेकिन ईरान के मामले में एक बड़ी समस्या यह है कि वहां इंटरनेट बंदी और कड़ी सेंसरशिप के कारण आम लोगों की जानकारी दुनिया तक नहीं पहुंच पा रही।
क्लिक की होड़ में बढ़ रहा फर्जी कंटेंटराज्य समर्थित अभियानों के अलावा कई सामान्य इंटरनेट मीडिया उपयोगकर्ता भी क्लिक और लोकप्रियता पाने के लिए गलत जानकारी फैला रहे हैं।
इनमें पुराने युद्धों के वीडियो को नए बताकर साझा करना, वीडियो गेम के दृश्य को असली हमले के रूप में पेश करना और एआइ से बनाए गए वीडियो पोस्ट करना शामिल है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक एआइ तकनीक ने गलत सूचना फैलाने को पहले की तुलना में कहीं आसान बना दिया है। इससे संकट की स्थितियों में सत्य और असत्य के बीच अंतर करना और भी मुश्किल हो गया है।
इंटरनेट मीडिया कंपनियों की कार्रवाई
इंटरनेट मीडिया मंच एक्स के उत्पाद प्रमुख निकिता बियर ने कहा है कि यदि कोई उपयोगकर्ता सशस्त्र संघर्ष से जुड़े एआइ-निर्मित कंटेंट को बिना स्पष्ट खुलासे के साझा करता है तो उसे प्लेटफार्म के राजस्व-साझाकरण कार्यक्रम से निलंबित कर दिया जाएगा।
पहली गलती पर 90 दिन का निलंबन और दोबारा ऐसा करने पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जाएगा। अटलांटिक काउंसिल के डिजिटल फोरेंसिक रिसर्च लैब के रणनीति निदेशक एमर्सन ब्रू¨कग का कहना है कि इंटरनेट मीडिया अब युद्ध का एक नया मोर्चा बन चुका है।