अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर में 2,000 पाउंड (करीब 970 किलोग्राम) के बंकर बस्टर बमों से हमला किया है।
इस हमले का वीडियो खुद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म टूथ सोशल पर साझा किया है।
माना जा रहा है कि इस्फहान शहर पर अमेरिका का हमला इस युद्ध की तीव्रता को बढ़ा सकता है। आइये जानते हैं कि इस्फहान शहर पर हमले के पीछे अमेरिका की क्या रणनीति है?
यूरेनियम का स्टॉक
जून 2025 के युद्ध से कुछ दिन पहले की एक सेटेलाइट तस्वीर से पता चलता है कि तेहरान ने यूरेनियम की एक बड़ी खेप इस्फहान के परमाणु केंद्र में भेजी थी।
9 जून, 2025 को ली गई इस तस्वीर में एक ट्रक को 18 नीले कंटेनरों के साथ इस्फहान परमाणु प्रौद्योगिकी केंद्र की एक सुरंग में जाते हुए देखा गया था।
बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स के विश्लेषक फ्रेंकोइस डियाज-मौरिन के अनुसार, उस ट्रक में लगभग 534 किलोग्राम यूरेनियम हो सकता था, जो 60 प्रतिशत तक शुद्ध था।
परमाणु हथियार बनाने के लिए 90 प्रतिशत शुद्धता की जरूरत होती है, और 60 से 90 प्रतिशत तक पहुंचना तकनीकी रूप से बहुत आसान है।
डियाज-मौरिन ने अपने विश्लेषण में लिखा है कि इस गणना से पता चलता है कि ईरान ने उस ट्रक के जरिये अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का पूरा स्टाक इस्फहान भेज दिया होगा।
इस्फहान में हैं सैन्य ठिकाने और रक्षा उद्योग
इस्फहान ईरान का एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां उसके सैन्य ठिकाने और रक्षा उद्योग हैं। जून 2025 में ईरान और इजरायल के बीच हुए 12 दिनों के युद्ध के दौरान, अमेरिका ने ईरान के जिन तीन यूरेनियम संर्धन केंद्रों पर बमबारी की थी, उनमें से एक इस्फहान में ही है।
ऐसा माना जाता है कि ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का एक बड़ा हिस्सा यहीं दबा हुआ है और अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह अपनी सेना भेजकर इसे कब्जे में ले सकता है।
बंकर बस्टर बमों से हमला
अमेरिकी सेना ने इस्फहान पर 2,000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों से हमला किया। ये खास तरह के बम होते हैं जो जमीन के अंदर गहराई में जाकर हमला करने या मजबूत बंकरों को तोड़ने के लिए बनाए जाते हैं। इन्हें आम तौर पर भूमिगत सैन्य ठिकानों, मजबूत बंकरों और परमाणु साइट्स पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
इन बमों की खासियत यह है कि इनका बाहरी हिस्सा बहुत मजबूत स्टील का होता है, जिससे ये मिट्टी और कंक्रीट की कई परतों को पार कर सकते हैं। ये बम जमीन के अंदर एक तय गहराई तक जाने के बाद ही फटते हैं।
हमले के जरिये ईरान को दिया संदेश
यह हमला उस दिन के एक दिन बाद हुआ जब ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर जल्द ही युद्ध खत्म करने के लिए समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा संसाधनों और जरूरी ढांचे जैसे परमाणु केंद्र और पानी के प्लांट को बड़े पैमाने पर नष्ट कर सकता है।
इस हमले से ऐसा लगता है कि अमेरिका युद्ध को और बढ़ाने के लिए तैयार है। यह युद्ध अब दूसरे महीने में पहुंच चुका है और इससे दुनिया के बाजार भी प्रभावित हुए हैं।