पाकिस्तान की ताकत नहीं बढ़ेगी, ‘घातक’ मिसाइल डील पर अमेरिका ने दी सफाई…

पाकिस्तान के साथ बड़ी डिफेंस डील को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स को लेकर अमेरिका ने सफाई दी है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ एडवांस मिडल रेंज की मिसाइल को लेकर कोई नई डील नहीं हुई है।

दूतावास की तरफ से जारी क्लैरिफिकेशन में कहा गया है कि पाकिस्तान को दिया जाने वाला कोई भी सहयोग उसकी क्षमता में किसी तरह की बढ़ोतरी करने वाला नहीं है।

अमेरिकी दूतावास की तरफ से कहा गया है कि 30 सितंबर को अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने कई देशों को बेचे जाने वाले हथियारों की लिस्ट जारी की थी। इसमें पाकिस्तान का भी नाम शामिल था।

वहीं कुछ झूठी मीडिया रिपोर्ट्स भी चल रही हैं। हालांकि पाकिस्तान को कोी भी नई एडवांस मीडियम रेंज एयर टु एयर मिसाइल (AMRAAM) देने की डील नहीं हुई है।

ऐसा कोई भी सहयोग पाकिस्तान को नहीं दिया जा रहा है जिससे उसकी क्षमता में बढ़ोतरी हो।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के नोटिफिकेशन के मुताबिक एग्रीमेंट में ब्रिटेन, पोलैंड, पाकिस्तान, फिनलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, रोमानिया, कतर, कोरिया, ओमान, स्विट्जरलैंड, यूनान, सिंगापुर, पुर्तकाल, चेक गणराज्य, जापाना, नीदरलैंड समेत कई अन्य देश भी शामिल हैं।

नोटिफिकेशन में यह नहीं बताया या था कि पाकिस्तान को कितनी AMRAAM मिसाइलें दी जाएँगी।

अमेरिका और पाकिस्तान के बीच यह डील भारत की टेंशन बढ़ाने वाली इसलिए भी है क्योंकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात के बाद ही यह लिस्ट जारी की गई थी।

माना जा रहा है कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक निकटता की स्थिति बन रही है। इसमें एक वजह यह भी है कि डोनाल्ड ट्रंप भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का दावा करते हैं।

भारत का कहना है कि दोनों देशों के बीच आपसी बातचीत के बाद ऑपरेशन सिंदूर रोका गया था। वहीं पाकिस्तान डोनाल्ड ट्रंप की हां में हां मिलाने का काम कर रहा है।

माना जा रहा था कि मिसाइल सौदे के बाद पाकिस्तान अपने एफ-16 के बेड़े को अपग्रेड करने की कोशिश करेगा। फरवरी 2019 में भी पाकिस्तान ने भारतीय विमानों पर इस मिसाइल का इस्तेमाल किया था।

हालांकि अमेरिका की सफाई भी इस बात को जाहिर करती है कि वह किसी भी कीमत पर यह नहीं चाहता कि भारत की नाराजगी और बढ़े। पहले से ही टैरिफ को लेकर दोनों देश में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

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