मासिक चक्र बंद होने (मीनोपॉज) के बाद 50 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं मूत्रमार्ग के रोग का शिकार हो रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ज्यादातर महिलाएं इस बात से अनजान होती हैं कि यह कोई बीमारी है और इसके लिए उन्हें किसी डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत भी है।
यह सामने आया है बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सोशल एंड प्रीवेंटिव मेडिसिन विभाग के रिसर्च व सर्वे में। यह सर्वे किया है विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी सिंह की अगुआई वाली टीम ने।
इस टीम में पांच चिकित्सक शामिल रहे। बीआरडी मेडिकल कालेज के चिकित्सकों की टीम ने चरगांवा ब्लॉक में मीनोपॉज वाली महिलाओं में सर्वे किया। यह पेपर अंतर्राष्ट्रीय जर्नल पबमेड और क्यूरियस में प्रकाशित हुआ है।
प्रौढ़ा अवस्था में महिलाओं का मासिक चक्र का बंद होना सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। लेकिन इस दौरान महिलाओं को यूरिनरी इनकांटिनेंस भी हो जाता है।
यह मूत्र मार्ग की बीमारी है। इस कारण यूरिन डिस्चार्ज पर महिलाओं का नियंत्रण कमजोर हो जाता है। असमय यूरिन डिस्चार्ज होने लगता है।
महिलाओं को यूरिन ट्रैक इंफेक्शन हो जा रहा है। कुछ महिलाओं में जननांगों के सूखापन की दिक्कत भी पाई गई।
महिलाओं ने नहीं कराया था इलाज
डॉ. शालिनी ने बताया कि सबसे ज्यादा चौंकाने वाला मामला यह मिला कि महिलाएं इसे बीमारी ही नहीं मान रही थीं। वह इसे बुढ़ापे का लक्षण बता रही थी। वह बीमार थी। लेकिन उन्होंने डॉक्टर से परामर्श नहीं किया था।
यह ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सामाजिक स्थिति को दर्शाता है। मासिक चक्र बंद होने से महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम हो जाता है।
यह समय उनके मानसिक तनाव का भी होता है। इस स्थिति में महिलाओं को चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता होती है। खास बात यह है कि ज्यादातर महिलाएं इससे अनजान थी।
महिलाओं से पूछे गए 30 सवाल
उन्होंने बताया कि मासिक चक्र बंद होने के बाद होने वाली दुश्वारियां पर सर्वे किया गया। इसके लिए महिलाओं से 30 सवाल की प्रश्नावली दी गई। इनमें महिलाओं को हो रही दुश्वारियों की जानकारी ली गई।
इनमें 70 फीसदी महिलाएं अशिक्षित थीं। इस वजह से चिकित्सकों ने महिलाओं से पूछकर जवाब भरे। इनमें से 50 फीसदी महिलाएं तो अत्यंत निर्धन परिवारों से जुड़ी थीं। 30% ने प्राथमिक या हाईस्कूल तक की पढ़ाई की थी।
यूरिनरी इंफेक्शन से जूझ रहीं महिलाएं
उन्होंने बताया कि सर्वे में चौंकाने वाली समस्या सामने आई। मीनोपॉज के बाद महिलाओं को यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और इंकांटीनेंस हो जा रहा है। करीब 54 फीसदी महिलाओं में यूरिनरी इनकांटिनेंस मिला।
इससे बीमारी में यूरिन असमय डिस्चार्ज हो जाता है। इससे महिलाओं को सार्वजनिक जगह पर जाने में झिझक महसूस होती है। उनके शरीर से बदबू आती है।
दो गांवों की 385 महिलाओं को सर्वे में किया गया शामिल
डॉ. शालिनी ने बताया कि चरगांवा के दो गांव को इस सर्वे शामिल किया गया था। इसमें मीनोपॉज से जूझ रहीं 40 से 55 वर्ष की 385 महिलाएं मिलीं।
इन महिलाओं में मासिक चक्र बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी या पूरी हो चुकी थी। डॉ. शालिनी ने बताया कि इन महिलाओं में 171 में बीते एक वर्ष से मासिक चक्र अनियमित था।
इसे मीनोपॉज ट्रांजेशन कहते हैं। जबकि 214 महिलाओं में मासिक चक्र बंद हो चुका था। इन्हें पोस्ट मीनोपॉज कहते हैं।