गेट गिरने से बच्चे की मौत के बाद पिता ने दिया शपथपत्र, सवाल उठे—आखिर इतनी जल्दी क्यों की गई कार्रवाई…

यूपी में प्रयागराज के बहरिया के चकिया धामौर गांव में जिस सात साल के ईशू की कम्पोजिट विद्यालय का गेट गिरने से मौत हुई, उसके अगले दिन ऐसा दस्तावेज सामने आया है, जो तमाम सवाल उठा रहा है।

यह दस्तावेज है ईशू के पिता मनोज पाल की ओर से दिया गया शपथपत्र, जिसे ग्राम प्रधान मान सिंह ने दिखाया।

सक्षम अधिकारी/ जिलाधिकारी को संबोधित मनोज की ओर बने इस शपथपत्र में लिखा गया है कि वो अपने बच्चे के साथ मॉर्निंग वॉक पर निकले थे।

टहलते हुए आगे चले गए और स्कूल का गेट जिसे अराजकतत्वों ने तोड़ दिया था, बच्चा उस पर खेलने लगा और उसकी मौत हो गई। नौ अक्तूबर को जारी हुआ यह शपथपत्र कई सवाल उठा रहा है।

क्या एक पिता जिसके बेटे की एक दिन पहले हृदय विदारक हादसे में मौत हो गई हो, वो इस मानसिक स्थिति में है कि शपथपत्र बनवा सके?

आखिर ऐसी क्या हड़बड़ी थी कि पिता को अगले दिन सात वर्षीय बेटे की मां को और खुद को संभालने के बजाए तहसील कार्यालय जाकर यह शपथपत्र बनवाना पड़ा? उसे यह शपथपत्र बनवाने की जरूरत क्यों पड़ी?

क्या यह शपथपत्र मनोज ने बनवाया या फिर उससे बनवाया गया? इन तमाम सवालों के जवाब किसी के पास नहीं हैं। वहीं ग्राम प्रधान का कहना है कि वह मनोज पाल को शपथ पत्र के साथ डीएम के पास लेकर जा रहे हैं।

दोषी जाएंगे जेल

एडीओ पंचायत रविदत्त मिश्र ने बताया कि स्कूल गेट की मरम्मत न कराने वाले दोषी बख्शे नहीं जाएंगे। वह अपनी जांच रिपोर्ट बड़े अफसर के पास भेजेंगे, जैसा अफसरों का निर्देश मिलेगा दोषी पर कार्रवाई की जाएगी।

सीडीओ, हर्षिका सिंह ने कहा कि शपथपत्र लेने की कोई व्यवस्था नहीं है, यह किसी के दबाव में लिखवाया गया है। इसके बारे में फिलहाल जानकारी नहीं है। पता करने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

बख्शा न जाए कोई दोषी : सीडीओ

इस हृदय विदारक घटना को जानने के बाद अधिकारी हर दोषी पर कार्रवाई के लिए काम कर रहे हैं। सीडीओ हर्षिका सिंह ने डीपीआरओ रविशंकर द्विवेदी से स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रधान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराओ, किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

यह पूछने पर कि प्रधानाध्यापक ने कहा है कि गेट के लिए बजट नहीं मिला, सीडीओ ने बताया कि उन्हें हर साल 50 हजार रुपये तक मरम्मत कार्य के लिए दिया जाता है। जब उनके स्कूल के गेट की स्थिति ऐसी थी तो पहले इस बजट का इस्तेमाल मरम्मत कार्य के लिए क्यों नहीं किया गया।

अगर स्कूल के खुले होने के वक्त गेट बच्चों की भीड़ पर गिर जाता तो जिम्मेदार कौन होता। केवल बहाने बनाने वाली बाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रकरण में सचिव का निलंबन पूर्व की किया जा चुका है। प्राथमिकी भी दर्ज की जा रही है। अब प्रधान के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कहा गया है।

ग्राम प्रधान-धमौर, मान सिंह ने कहा कि ईशू के घर शौचालय नहीं है, उनके पिता मनोज के छह भाइयों के बीच उनके भाई ने खुद शौचालय बनवाया है। अब आने वाले समय में ईशू के पिता के मनोज को सरकारी शौचालय देने की पूरी कोशिश करूंगा।

पड़ोसियों के चूल्हे भी रहे ठंडे

ईशू की मौत से चकिया धामौर गांव में हर कोई दु:खी है। उसकी मां कांति देवी दिनभर बिलखती रही और इसे सुनकर पड़ोसियों के चूल्हे भी नहीं जले। यदि जिम्मेदारों ने स्कूल गेट की मरम्मत कराई होती तो ऐसा दु:खद हादसा नहीं होता।

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