अमेरिका के विरोध के बाद ब्रिटेन ने चागोस द्वीप का मामला टाला, ‘डिएगो गार्सिया बेस’ की सुरक्षा बनी प्राथमिकता…

 अमेरिका के कड़े विरोध के बाद ब्रिटेन ने चागोस द्वीपसमूह को मारीशस को सौंपने से जुड़े अपने प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया है।

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण इन द्वीपों पर स्थित रणनीतिक रूप से अहम डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा है, जहां अमेरिका और ब्रिटेन दोनों की सैन्य मौजूदगी है।

ब्रिटिश सरकार ने साफ किया है कि वह इस समझौते को तभी आगे बढ़ाएगी, जब उसे अमेरिका का पूरा समर्थन मिलेगा।

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार इस समझौते को लागू करने के लिए कानून लाने की तैयारी में थी, लेकिन अब इसे संसद के अगले एजेंडे में शामिल नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि वह वाशिंगटन को मनाने की कोशिश जारी रखेगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पहले ही इस समझौते को बड़ी गलती बता चुके हैं, जिससे दोनों देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।दीर्घकालिक सुरक्षा उसकी प्राथमिकताप्रस्तावित समझौते के तहत ब्रिटेन चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मारीशस को सौंप देता, लेकिन डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे पर 99 साल की लीज के जरिए अपना नियंत्रण बनाए रखता, ताकि वहां अमेरिकी सैन्य संचालन जारी रह सके।

ब्रिटेन ने दोहराया है कि इस बेस की दीर्घकालिक सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। इस पूरे मुद्दे के बीच ब्रिटेन और अमेरिका के रिश्तों में भी खिंचाव देखने को मिला है।

हाल के दिनों में कीर स्टार्मर ने अमेरिका-इजरायल के ईरान के खिलाफ युद्ध में सीधे शामिल होने से हिचक दिखाई थी और शुरुआत में अमेरिकी हमलों के लिए अपने एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी थी। हालांकि बाद में अमेरिका को रक्षात्मक कार्रवाई के लिए सीमित अनुमति दी गई।

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