यमुना तट पर 24.29 करोड़ रुपये की लागत से 5.5 किलोमीटर लंबा नेचर वॉकवे बनाया जाएगा। मथुरा में इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और श्रद्धालुओं को एक नया अनुभव मिलेगा…

कान्हा की नगरी भव्य और दिव्य बनने जा रही है। विकास की शृंखला में एक और अध्याय नेचर वाकवे के रूप में जुड़ गया। यमुना किनारे साढ़े पांच किमी लंबा नेचर वाक बनेगा। नीमबाड़ी पर बड़ी पार्किंग बनेगी।

बायो टॉयलेट बनाया जाएगा। नेचर वाक वे पर हरियाली नजर आएगी। सोलर लाइटें लगाई जाएंगी। शासन ने इसको मंजूरी देते हुए प्रथम किस्त भी जारी कर दी है। इसके बनने के बाद श्रद्धालुओं को सुखद अहसास होगा, साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

बंगाली घाट से नीमबाड़ी तक साढ़े पांच किमी क्षेत्र का होगा विकास

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कान्हा की नगरी में द्वापर युग जीवंत कर रहे हैं। इस ओर उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद कार्ययोजना तैयार कर रही है। जल निगम सी एंड डीएस ने मथुरा में बंगाली घाट से मथुरा ब्लॉक के समीप नीमबाड़ी तक यमुना किनारे के क्षेत्र को ईको पर्यटन के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना बनाई।

कुल 24.29 करोड़ रुपये की इस परियोजना को शासन ने हाल ही में मंजूरी देने के साथ प्रथम किस्त के रूप में 12.14 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही कार्यदायी विभाग टेंडर की प्रक्रिया में जुट गया है।

01 बायो टॉयलेट, तीन साइनेज, पांच डस्टबिन, 15 बेंच लगेंगी।

इस परियोजना के तहत बंगाली घाट से नीमबाड़ी तक करीब ढाई किलोमीटर लंबा यमुना किनारे पांच मीटर चौड़ा नेचर वाकवे बनाया जाएगा। यमुना किनारे पत्थरों की फेंसिंग बनाई जाएगी।

दो मीटर की ग्रीन बेल्ट बनाई जाएगी, जिसमें देशज प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। जगह-जगह पर श्रद्धालुओं के आराम के लिए ब्रेंच बनाई जाएंगी। पूरे वाकवे में सोलर लाइटों को लगवाया जाएगा। दूब घास भी लगाई जाएगी। एक बायो टॉयलेट बनाई जाएगी।

बंगाली घाट को बनाया जाएगा आकर्षक

बंगाली घाट को आकर्षक बनाया जाएगा। रास्ते में पड़ने वाले मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाएगा। पार्किंग बनाई जाएगी, जहां सुविधाएं विकसित होंगी।

नेचर वॉक के पास आकर्षक स्थल विकसित किए जाएंगे, जो रमणीक होने के साथ ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करेंगे। यहां विशेष प्रजाति के फूलदार पौधे लगाए जाएंगे।

नहीं बिगड़ेगा घाट का स्वरूप

यमुना वॉकवे का निर्माण कार्य इस तरह डिजायन किया गया है, जिससे घाट का प्राचीन स्वरूप नहीं बिगड़ेगा। इसका पूरा ध्यान रखा गया है। वहीं बाढ़ आने भी ये वॉकवे प्रभावित नहीं होगा। इसके लिए पत्थरों की फेंसिंग बनाई जाएगी।

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