9 बजट, 9 साड़ियां: आंकड़ों के साथ भारतीय परंपरा भी संसद पहुंची, सीतारमण के पहनावे ने खींचा सबका ध्यान…

संसद की सीढि़यों पर जैसे ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण हाथ में डिजिटल ‘बहीखाता’ लेकर आगे बढ़ीं, देश की निगाहें सिर्फ बजट के आंकड़ों पर नहीं, उनके पारंपरिक परिधान पर भी टिक गईं।

पिछले नौ वर्षों में यह एक परंपरा बन चुकी है कि हर बजट के साथ एक नई साड़ी और उसके साथ भारत की किसी न किसी कला, संस्कृति या बुनकरी परंपरा की कहानी।

देश की वित्त मंत्री के लिए साड़ी केवल पहनावा नहीं, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत का संदेश बन चुकी है।

साड़ी की खासियत

हर वर्ष उनकी साड़ी किसी न किसी राज्य के बुनकरों और कलाकारों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाती है। 2026 में सीतारमण वाइन कलर की हाथ से बुनी कांजीवरम कट्टम साड़ी में नजर आईं।

तमिलनाडु के कांचीपुरम से जुड़ी लगभग 400 वर्ष पुरानी इस बुनकरी परंपरा की पहचान इसका सिल्क और सुनहरी चमक है।

साड़ी पर बने ‘कट्टम’ यानी चौकोर डिजाइन दक्षिण भारतीय पाडी कोलम की याद दिलाते हैं, जो स्थिरता और पवित्रता के प्रतीक माने जाते हैं। गहरे नीले और ब्राउन बार्डर के साथ सुनहरे-भूरे आंचल ने पूरे परिधान को गंभीर और गरिमामय रूप दिया।

इसके साथ पीले रंग का स्वेटर और भूरे रंग का शाल उनके सादे, लेकिन प्रभावशाली अंदाज को परिपूर्ण करता नजर आया। यह साड़ी बिना भारी कढ़ाई के है, फिर भी इसकी शालीनता और पारंपरिक सौंदर्य बजट जैसे गंभीर मौके के लिए बिल्कुल सटीक रही।

2025 में पहनी थीं खास साड़ी

2025 में उन्होंने बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी पहनकर लोक कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाई थी। पद्म पुरस्कार से सम्मानित कलाकार दुलारी देवी द्वारा तैयार इस साड़ी के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि भारत की अर्थव्यवस्था की जड़ें उसकी लोक परंपराओं में बसती हैं।2024 में वित्त मंत्री आफ व्हाइट साड़ी में दिखीं, जिसमें बैंगनी बार्डर था।

सफेद शांति का प्रतीक बना, तो बैंगनी दूरदर्शिता का। वहीं अंतरिम बजट में नीली टसर सिल्क ने स्थिरता का संकेत दिया।2023 में लाल साड़ी ने ऊर्जा और आत्मविश्वास को दर्शाया।2022 में ओडिशा की काफी कलर की बोमकाई साड़ी के जरिये पूर्वी भारत की बुनकरी को सम्मान मिला।

2021 में कोरोना काल के बजट में लाल बार्डर वाली आफ व्हाइट साड़ी कठिन समय में सादगी और संकल्प का प्रतीक बनी।2020 के बजट में पीली सिल्क साड़ी शुभता और सकारात्मकता का संदेश लेकर आई।

इसी साल उनका सबसे लंबा बजट भाषण भी हुआ। 2019 में पहले बजट के दौरान गुलाबी सिल्क साड़ी संतुलन और गंभीरता का प्रतीक बनी।

‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश

कांजीवरम, बोमकाई, मधुबनी, टसर सिल्क या संबलपुरी, वित्त मंत्री की हर साड़ी सीधे तौर पर देश के बुनकरों और कुटीर उद्योगों को समर्थन देती है।

यही कारण है कि बजट के दिन इंटरनेट मीडिया पर टैक्स स्लैब के साथ-साथ उनकी साड़ी की बनावट और उसके भौगोलिक संकेत पर भी चर्चा होती है।

आंकड़ों के इस महायज्ञ में सीतारमण की साडि़यां यह याद दिलाती हैं कि भारत की असली ताकत उसकी परंपराओं, कारीगरों और स्थानीय हुनर में बसती है और शायद यही वजह है कि उनका हर बजट लुक एक नई कहानी कह जाता है।

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