प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज परीक्षा पर चर्चा की। परीक्षा पे चर्चा के 9वें संस्करण में पीएम मोदी ने छात्रों के साथ बातचीत की। इस दौरान छात्रों ने पीएम मोदी से कई तरह के सवाल किए।
पीएम मोदी ने छात्रों को सलाह दी कि इंटरनेट सस्ता है, लेकिन इंटरनेट पर अपना किमती समय बिल्कुल भी बर्बाद न करें।
परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने अपने उम्र का जिक्र करते हुए कहा, “अभी मेरे जन्मदिन पर 17 सितंबर को एक नेता ने फोन किया और कहा कि आपके 75 साल हो गए, तो मैंने उसे कहा कि 25 अभी बाकी हैं। मैं बीते हुए को नहीं, बल्कि बचे हुए को गिनता हूं।”
स्किल ज्यादा जरूरी है या मार्क्स?
परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी से एक छात्र ने पूछा- स्किल ज्यादा जरूरी है या मार्क्स? इसका जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हर चीज में संतुलन होना चाहिए। एक तरफ झुकोगे तो गिरोगे ही गिरोगे। उन्होंने आगे कहा स्किल दो तरीके की होती है पहली लाइफ स्किल और दूसरी प्रोफेशनल स्किल। ऐसे में इन दोनों स्किल पर ध्यान देना जरूरी है।”
पीएम मोदी ने कहा कि बिना अध्ययन और ऑब्जरवेशन किए और बिना ज्ञान प्रयुक्त किए कोई भी स्किल आ सकता है क्या? स्किल की शुरुआत तो ज्ञान से ही होती है, उसका महत्व कम नहीं है।
पीएम मोदी ने छात्रों से कहा आपके माता-पिता, शिक्षक या सहपाठी कुछ भी कहें लेकिन आपको खुद पर विश्वास होना चाहिए। साथ ही आपको परीक्षा से संबंधित जो कुछ भी सुझाव मिल रहे हैं, उनका विशेष ध्यान भी रखें।
हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए…
पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षक का प्रयास रहना चाहिए कि छात्र की स्पीड इतनी है मेरी स्पीड से एक कदम ज्यादा रहनी चाहिए। हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए, जो पहुंच में हो, लेकिन पकड़ में न हो।
पहले बड़े परिवार के बच्चे लाते थे नंबर
हमारे देश में बोर्ड के एग्जाम में नंबर लाने वाले बच्चे छोटे-छोटे गांव से हैं, पहले बड़े परिवार और बड़े स्कूल के बच्चे ही नंबर लाते थे।
अभी कुछ दिन पहले मैं ब्लाइंड क्रिकेट टीम की बच्चियों से मिला, वो जीतकर आई थीं, जब मैंने उनको सुना तो मेरी आंखों में आंसू आ गए।
पीएम मोदी के टॉप 5 ‘एग्जाम मंत्र’
- परीक्षा को उत्सव की तरह मनाएं।
- प्रतिस्पर्धा खुद से, न कि दूसरों से।
- डिजिटल फास्टिंग: तकनीक का सही उपयोग।
- मुश्किल काम पहले निपटाएं।
- एग्जाम वॉरियर बनें, रट्टू तोता नहीं।
हमें भ्रम में नहीं रहना चाहिये
उनके पास घर नहीं है, और वो ब्लाइंड हैं, खेलना सीखा और दिव्यांग होने के बावजूद भी वो यहां तक पहुंची। हमें इस भ्रम में नहीं रहना चाहिये कि कंफर्ट जोन ही जीवन बनाता है, जीवन बनता है, जिंदगी जीने के तरीके से।
जीवन में कर्म को प्रधान मानना चाहिए
सपने न देखना एक क्राइम है। सपने देखने ही चाहिए, लेकिन सपनों को गुनगुनाते रहना कभी काम नहीं आता है। इसलिए, जीवन में कर्म को ही प्रधान मानना चाहिए।