नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे 18 वर्षीय छात्र की शहर के एक निजी अस्पताल में हेपैटिक एन्सेफैलोपैथी बीमारी के कारण मौत हो गई।
एक अधिकारी ने शनिवार को इसकी जानकारी दी, हेपैटिक एन्सेफैलोपैथी यकृत की गंभीर बीमारी है, जिसके कारण स्नायु तंत्र में होने वाली गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो जाती हैं।
छात्र वैभव रॉय जवाहर नगर इलाके में रहने वाले उन 36 छात्रों में से है जो पिछले कुछ दिनों से इस बीमारी से जूझ रहे हैं।
इनमें से 18 छात्रों के स्वास्थ्य में सुधार हो गया है, जबकि अन्य का तीन निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
कोटा के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी ‘सीएमएचओ’ डॉक्टर जगदीश सोनी ने पीटीआई से कहा कि पता चला है कि इलाके में पानी आपूर्ति करने वाले तीन आपूर्तिकर्ता कोचिंग संस्थानों, छात्रावासों और कैंटीन में दूषित पेयजल दे रहे थे।
हालांकि उन्होंने कहा कि रॉय की मृत्यु के वास्तविक कारण का पता पोस्टमार्टम के बाद ही चलेगा।
पश्चिम बंगाल का रहने वाला था छात्र वैभव रॉय
रॉय मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला था, लेकिन वर्षों से अपने परिवार के साथ यहां कैथून कस्बे में रह रहा था।
रॉय का इलाज करने वाले डॉक्टर राजीव शर्मा ने कहा कि उसे बुखार और पीलिया होने के बाद पांच अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और कुछ दिनों के भीतर ही उसके हेपैटिक एन्सेफैलोपैथी से ग्रस्त होने की पुष्टि हुई।
डॉक्टर शर्मा ने बताया कि उसके मस्तिष्क में सूजन थी जो बिगड़ गई और बृहस्पतिवार को उसकी मौत हो गई।
35 छात्रों के हेपेटाइटिस ए से पीड़ित होने की पुष्टि
वहीं, डॉक्टर सोनी ने बताया कि हाल ही में 35 छात्रों के हेपेटाइटिस ए से पीड़ित होने की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि इसके बाद विभिन्न स्रोतों से पानी के कम से कम 65 नमूने लिए गए।
उन्होंने बताया कि कोचिंग संस्थानों, छात्रावासों और कैंटीनों में पानी की आपूर्ति करने वाले तीन लोगों के पानी के दूषित होने की पुष्टि हुई है।
एडीएम ने जांच का आदेश देकर मांगी रिपोर्ट
कोटा ‘सदर’ के अपर जिला मजिस्ट्रेट बृजमोहन बैरवा ने कहा कि सीएमएचओ को मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया है और उनकी रिपोर्ट की प्रतीक्षा है।