रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के दो बड़े हिस्सों को रूस में मिला दिया।
पुतिन ने शुक्रवार तड़के यूक्रेन के खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों की कथित स्वतंत्रता को मान्यता दे दी।
इसी के साथ उन्होंने यूक्रेन को एक बार फिर से बाचतीत का न्योता दिया है। हालांकि इस दौरान पुतिन ने एक शर्त रखते हुए कहा कि वे नए शामिल किए गए इलाकों को नहीं छोड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि अगर इन इलाकों को छुड़ाने के लिए हमला किया गया तो इसे रूस पर हमला माना जाएगा।
पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय नियमों को दरकिनार करते हुए शुक्रवार को यूक्रेन के इलाकों को अपने देश में शामिल करने के आधिकारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए।
इन क्षेत्रों पर हमला मतलब रूस पर हमला- पुतिन
क्रेमलिन के भव्य श्वेत और सुनहरे सेंट जॉर्ज हॉल में विलय समारोह में पुतिन और यूक्रेन के चार क्षेत्रों के प्रमुखों ने रूस में शामिल होने के लिए संधियों पर हस्ताक्षर किए।
पुतिन की चेतावनी के बावजूद सात महीनों से चले आ रहे युद्ध के और तेज होने की आशंका है। पुतिन ने क्रेमलिन में समारोह के दौरान यूक्रेन को चेतावनी देते हुए कहा कि अब इन क्षेत्रों के लोग रूसी नागरिक हैं और अगर हमला किया गया तो रूस अपने नागरिकों और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी ताकत से जवाबी कार्रवाई करेगा। यूक्रेन से सैन्य कार्रवाई को ‘तुरंत’ बंद करने का आह्वान करते हुए पुतिन ने कहा कि कीव को बातचीत करनी चाहिए।
कई सालों से योजना पर काम कर रहा था रूस
यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने इसे सीधे-सीधे जमीन कब्जाना करार देते हुए कहा कि यह बंदूक के बल पर झूठी कवायद है। पूर्वी यूक्रेन के अलगाववादी दोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्र को 2014 में आजादी की घोषणा के बाद से ही रूस का समर्थन मिला था।
यूक्रेन के क्रीमिया प्रायद्वीप के विलय के कुछ हफ्तों बाद ही रूस ने यह कदम उठाया था। यूक्रेन में 24 फरवरी को रूसी सैनिकों के हमले के कुछ दिनों बाद ही दक्षिणी खेरसान क्षेत्र और पड़ोसी जापोरिज्जिया के कुछ क्षेत्रों पर रूस ने कब्जा कर लिया था।
यूक्रेन के इन क्षेत्रों का अब आगे क्या होगा?
क्रेमलिन-नियंत्रित रूसी संसद के दोनों सदनों की अगले सप्ताह बैठक होगी जिसमें इन क्षेत्रों को रूस में शामिल किए जाने के लिए संधियों पर मुहर लगाई जाएगी और उन्हें उनकी मंजूरी के लिए पुतिन के पास भेजा जाएगा।
पुतिन और उनके सिपहसालारों ने यूक्रेन को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि वह इन क्षेत्रों को पुन: कब्जाने की कोई आक्रामक कोशिश न करे और कहा कि रूस ऐसे किसी भी कृत्य को अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता के खिलाफ हमला मानेगा तथा जवाबी कार्रवाई के लिए “सभी उपलब्ध संसाधनों” (रूस के परमाणु हथियारों के संदर्भ में) का उपयोग करने से हिचकेगा नहीं।
रूस की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर क्रेमलिन प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस का कम से कम पूरे दोनेत्स्क क्षेत्र को ‘आजाद’ कराने का लक्ष्य है।
पुतिन के इस बड़े कदम के बाद आगे क्या होगा?
शुक्रवार को यूक्रेन के और अधिक हिस्से पर कब्जा करने की रूस की योजना सात महीने के युद्ध में तेजी आने का संकेत है।
उम्मीद है कि इस घटना के बाद रूस को और अधिक अलग-थलग कर दिया जाएगा। साथ ही उस पर और अधिक अंतरराष्ट्रीय दंड लगाया जाएगा और यूक्रेन को अतिरिक्त सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक समर्थन मिलेगा।
रूस ने इन क्षेत्रों की स्वतंत्रता को तब मान्यता दी है जब कुछ दिनों पहले उसने ‘जनमत संग्रह’ कराया था। यूक्रेन और पश्चिम देशों के अधिकारियों ने जनमत संग्रह के लिए हुए मतदान को गैरकानूनी बताकर इसकी निंदा की है।