दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने एक मोटरसाइकिल सवार को कथित रूप से टक्कर मारने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी को रद्द करते हुए उसकी रिहाई का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने उस व्यक्ति से किसी एक ऐसे अनाथालय को भोजन उपलब्ध कराने के लिए कहा जिसमें 100 से कम बच्चे नहीं रह रहे हों।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह पांच अक्टूबर (दशहरा) और 24 अक्टूबर (दिवाली) को यह भोजन उपलब्ध कराये। अदालत ने यह भी साफ किया कि दिया जाने वाला भोजन स्वास्थ्यवर्धक और सुरक्षित जगह पर अच्छी तरह से पकाया हुआ होना चहिए। अदालत ने भोजन परोसते समय कोविड-19 संबंधी दिशानिर्देशों के पालन को भी जरूरी बताया।
अदालत ने अतिरिक्त लोक अभियोजक से कहा कि वह अनाथालय की पहचान करके इसका नाम याचिकाकर्ता के वकील को दें। अदालत ने यह भी कहा कि अनाथालय में बच्चों की संख्या 100 से कम नहीं होनी चाहिए।
यह प्राथमिकी 13 सितंबर, 2022 को हरी नगर पुलिस थाने में दर्ज कराई गई थी। लेकिन अदालत ने इस प्राथमिकी को रद्द करते हुए हिरासत में लिये गये व्यक्ति को रिहा करने का आदेश दिया।