उद्धव ठाकरे गुट और शिंदे गुट के बीच की पार्टी के नाम और निशान की लड़ाई में चुनाव आयोग का फैसला आ चुका है।
हालांकि यह अभी फाइनल डिसीजन नहीं है, क्योंकि आयोग ने शिंदे गुट द्वारा चुनाव चिह्न के लिए दिए गए सभी विकल्पों को खारिज कर दिया है।
बता दें कि शिंदे गुट ने चुनाव चिह्न के लिए त्रिशूल, उगता हुआ सूरज और गदा का विकल्प दिया था।
लेकिन चुनाव आयोग ने इन सभी खारिज करते हुए कल सुबह 10 बजे तक तीन नए विकल्प मांगते हैं।
आइए जानते हैं आखिर चुनाव आयोग ने शिंदे गुट के चुनाव चिह्न के विकल्पों को किस आधार पर खारिज किया…
त्रिशूल इसलिए हुआ खारिज
चुनाव आयोग की तरफ से जारी पत्र में शिंदे गुट के लिए लिखा गया है कि आपके द्वारा चुनाव चिह्न के विकल्प दिए गए हैं, वह फ्री सिंबल्स की लिस्ट में नहीं हैं।
साथ ही यह भी कहा गया है कि शिंदे गुट द्वारा उपलब्ध कराए गए विकल्प चुनाव आयोग के 23 सितंबर 2021 को जारी नोटिफिकेशन और इस साल 8 अक्टूबर को जारी अंतरिम आदेश पर खरा नहीं उतरता।
इस क्रम में आयोग ने कहा है कि त्रिशूल एक धार्मिक प्रतीक है। कहा गया है कि अगर इसे चुनाव चिह्न के तौर पर एलॉट किया जाता है तो यह उस बात का उल्लंघन होगा जिसके तहत किसी राजनीतिक दल को धार्मिक या सांप्रदायिकता से जुड़ा चिह्न नहीं दिया जा सकता है। दूसरी वजह यह रही कि ठाकरे गुट ने भी इसे अपनी प्रिफरेंस में रखा था।
उगता सूरज इसलिए नहीं दिया गया
चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को उगता सूरज चुनाव चिह्न देने से भी मना कर दिया। इसके पीछे तर्क यह दिया गया कि यह पहले ही द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का चुनाव निशान है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम तमिलनाडु और पुडुचेरी की जानी-पहचानी पार्टी है।
वहीं, यहां भी दूसरी वजह यही बनी कि ठाकरे गुट ने भी इसे अपने चुनाव निशानों के विकल्प में शामिल कर रखा था।
गदा देने पर इसलिए राजी नहीं हुआ आयोग
वहीं शिंदे गुट को गदा नहीं देने के रास्ते में भी इसका धार्मिक प्रतीक होना आड़े आया। चुनाव आयोग द्वारा जारी पत्र के मुताबिक इस तरह के चुनाव निशान राजनीतिक दलों को नहीं दिए जा सकते हैं, जो धार्मिक प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल होते हैं। चुनाव आयोग के मापदंडों के आधार पर यह निशान भी फ्री सिंबल की लिस्ट में नहीं है।