विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को भारत और चीन में घरेलू वैक्सीन को मंजूरी दिए जाने के फैसले का स्वागत किया है।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि नेजल टीके कोरोना वायरस की महामारी को काबू करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
साथ ही यह भी कहा कि वह नए टीकों के पीछे के आंकड़ों को देखना चाहते हैं, ताकि यह आकलन किया जा सके कि उन्हें वैश्विक स्तर पर मंजूरी दी जाए या नहीं।
चीन ने रविवार को दुनिया की पहली नेजल या इनहेल वैक्सीन डेवलप कर ली है। चीन ने कैनसिनो के Ad5-nCoV वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे दिया है।
वहीं भारत ने मंगलवार को भारत बायोटेक द्वारा विकसित आपातकालीन उपयोग के लिए नेजल कोविड -19 वैक्सीन को मंजूरी दे दी।
डब्ल्यूएचओ के आपात निदेशक माइक रयान ने कहा कि नाक के टीके फेफड़ों में मौजूद श्वसन म्यूकोसा में इम्यून रिस्पांस को बढ़ाते हैं।
उन्होंने कहा, “नेजल वैक्सीन के जरिये आप रक्षा की पहली पंक्ति तैयार कर रहे हैं, जहां से वायरस प्रवेश करता है और बहुत नुकसान पहुंचाता है।” नाक के टीके संभावित रूप से किसी व्यक्ति को संक्रमित होने और वायरस को फैलने से रोक सकते हैं।
रेयान ने बताया कि कैसे पोलियो जैसी बीमारियों से निपटने के लिए नाक और इंजेक्शन वाले टीकों का उपयोग किया जाता है। कोविड -19 पर डब्ल्यूएचओ की तकनीकी प्रमुख मारिया वान केरखोव ने भी इस खबर का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि हम टीकों के पिछले आंकड़ों को देखने के लिए उत्साहित हैं कि कैसे इन्होंने काम किया। चीन ने दुनिया की पहली नेजल या इनहेल वैक्सीन डेवलप कर ली है।
चीन में कैनसिनो के Ad5-nCoV वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी भी मिल चुकी है। इस वैक्सीन को सूंघकर (Inhale) कोरोना से बचाव किया जा सकता है।
बता दें कि बीते मंगलवार को भारत बायोटेक के इंट्रानेजल (नाक के जरिए दी जाने वाली) वैक्सीन को कोरोना वायरस के खिलाफ इस्तेमाल के लिए भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) से मंजूरी मिल गई।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया ने मंगलवार को यह जानकारी दी थी।
इससे पहले बीते 15 अगस्त को कंपनी ने नाक के रास्ते दिए जाने वाले कोविड-19 टीके के तीसरे चरण के सफल परीक्षण की घोषणा की थी।