पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात के कुछ अहम बंदरगाहों के आसपास रहने वाले लोगों को तुरंत वहां से हट जाने की चेतावनी दी है।
यह चेतावनी उस समय आई जब फुजैराह के ऊर्जा प्रतिष्ठानों की दिशा से काला धुआं उठता देखा गया।
यह घटनाक्रम अमेरिका द्वारा ईरान के खार्ग द्वीप पर किए गए हमले के कुछ घंटों बाद सामने आया।
ईरान की समाचार एजेंसी ने कहा कि यूएई के तीन प्रमुख बंदरगाह अब ‘वैध सैन्य लक्ष्य’ बन गए हैं और आने वाले घंटों में उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।
तीन बड़े बंदरगाहों से दूर रहने की चेतावनी
ईरान की समाचार एजेंसी तसनीम ने लोगों से जेबेल अली पोर्ट, खलीफा पोर्ट और फुजैराह पोर्ट के आसपास के इलाकों को तुरंत खाली करने को कहा।
एजेंसी के अनुसार इन जगहों पर अमेरिकी सैन्य बल नागरिक इलाकों के बीच छिपे हुए हैं, इसलिए ये स्थान संभावित लक्ष्य बन गए हैं। ईरान ने दावा किया कि इन ठिकानों पर जल्द हमला किया जा सकता है।
ईरान की सेना की इकाई इस्लामिक गार्ड ऑफ रिवोल्यूशनरी कॉर्प्स के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फगारी ने यूएई नेतृत्व को सीधी चेतावनी दी।
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी सेना यूएई के शहरों के भीतर बंदरगाहों और डॉक का इस्तेमाल करती है तो ईरान के पास उन्हें निशाना बनाने का वैध अधिकार है।
आईआरजीसी ने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को भी निशाना बनाया जा सकता है, भले ही अमेरिका ने ऐसा न करने की चेतावनी दी हो।
फुजैराह में दिखा धुआं
इसी बीच यूएई अधिकारियों ने कहा कि एक ड्रोन को मार गिराने के बाद उसके मलबे के गिरने से आग लग गई थी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह घटना ठीक किस जगह हुई।
लेकिन जो काला धुआं दिखाई दिया वह फुजैराह के बंदरगाह इलाके की दिशा से उठता दिखा, जहां बड़ा तेल भंडारण और निर्यात केंद्र मौजूद है। इस महीने की शुरुआत में भी ड्रोन हमलों से फुजैराह के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया था।
खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमला
अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान के खार्ग Island पर हमला किया था, जहां से ईरान के लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है। अमेरिकी सेना की मिडिल ईस्ट कमान US सेंट्रल कमांड के अनुसार इस हमले में 90 से ज्यादा ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इनमें नौसैनिक बारूदी सुरंग भंडार और मिसाइल स्टोरेज बंकर भी शामिल थे, जबकि तेल ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ठिकाने बने निशाना
युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है। हमलों में सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी, कतर की रास लाफान गैस प्रसंस्करण केंद्र और यूएई की रुवैस रिफाइनरी जैसी बड़ी ऊर्जा परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। इन हमलों के कारण क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति और तेल व्यापार पर दबाव बढ़ गया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर असर
ईरान ने प्रभावी रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही रोक दी है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का व्यापार इसी रास्ते से होता है, इसलिए इस संकट का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है। यूएई को भी तेहरान द्वारा किए गए जवाबी हमलों के बाद बार-बार मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है।
शनिवार को UAE मिनिस्ट्री ऑफ फोरन अफेयर्स ने इराकी कुर्दिस्तान में स्थित अपने वाणिज्य दूतावास को निशाना बनाने की घटना की कड़ी निंदा की। यूएई की विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री लाना नुसेबेह ने कहा कि जब तक हमले जारी हैं, तब तक किसी भी तरह की मध्यस्थता की बात करना मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि ईरान के साथ दो हफ्ते पहले हुई बातचीत में यह संकेत नहीं मिला था कि यूएई को निशाना बनाया जाएगा, इसलिए मौजूदा हमले बेहद चौंकाने वाले हैं। ईरान का कहना है कि उसके हमले क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए जा रहे हैं। यूएई के अलावा सऊदी अरब, कतर, इराक, जॉर्डन और तुर्की में भी अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।